को लालू-तेजस्वी ने क्यों बनाया पार्टी अध्यक्ष जिन्हें नहीं मालूम ‘उनकी कितनी पत्नी है’, सांसदी हुई थी रद्द, दलबदलू का इतिहास, जानिए सबकुछ
सिटी पोस्ट लाइव :राजनीति मे सबकुछ जायज होता है खासतौर पर तब जब उसका मकसद राज पर कब्जा करना होता है .यहीं कारण है कि अपने सबसे भरोसेमंद युवा नेता आलोक मेहता की जगह तेजस्वी यादव ने मंगनीलाल मंडल को पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए चुना. कहा गया कि हाल ही में वैशाली कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में ED की छापेमारी ने आलोक मेहता को विवादों में ला दिया. तेजस्वी यादव आरजेडी की छवि को खराब नहीं करना चाहते हैं. इसलिए मंगनीलाल मंडल के हाथ मे पार्टी की कमान दे दी. लेकिन अब ये चर्चा है कि छवि बचाने के चक्कर मे तेजस्वी यादव ने मंगनीलाल मंडल को चुनकर अपनी छीछालेदर करवा ली है.
वैसे तो मंगनीलाल मंडल अति-पिछड़ा समाज के बड़े नेता हैं. मजदूरी कर जीवन यापन करनेवाले माता पिता के इस पुत्र ने राजनीति मे अपनी अलग पहचान बनाई. मंडल का राजनीतिक पहचान मृदुभाषी, विद्वान,कानून के जानकारी रखने वाले नेता के रूप में है. श्री मंडल का राजनीतिक सफर एआईएसएफ से शुरू हुआ, लेकिन 1967 में डॉ राममनोहरलोहिया एवं मधुलमय के विचार से प्रभावित होकर लोकदल में शामिल हो गए.वे वर्ष 1986 से 2004 तक लगातार 18 वर्षो तक बिहार विधान परिषद के सदस्य तथा बिहार सरकार में मंत्री भी रहे. वर्ष 2004 से 2009 तक आरजेडी से राज्यसभा एवं 209 से 2014 तक जेडीयू लोकसभा के सदस्य रहे. 2014 में राजद के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए. 2019 में जदयू में शामिल हुए तथा पार्टी में एक मात्र राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए.
वर्ष 2024 के लोकसभा में प्रत्याशी नही बनाए जाने तथा अतिपिछड़ा समुदाय के बड़े नेताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पार्टी से बगावत कर दिए. उन्हें जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यसमिति से बाहर कर दिया गया. जिसके बाद मंडल 06 जनवरी 2025 को आरजेडी मे शामिल हो गये .ये तो हुई इनकी खासियत लेकिन इनके जीवन से कई कहानियाँ जुड़ी हैं जो इनको एक दागदार और दल-बदलू नेता बनाती हैं. इनकी लोकसभा की सदस्यता पटना हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से एकबर रद्द हो चुकी है . मंगनी लाल मंडल की कितनी पत्नियां यह भी उन्हें याद नहीं. और तो और पत्नी -बेटे के साथ मारपीट करने के आरोप भी झेल चुके हैं.
दरअसल, मंगनी लाल मंडल का चुनावी हलफनामा में पत्नी की जानकारी नहीं देने से जुड़े मामले में जब पटना हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही थी तब एक रोचक मामला हुआ था. मंगनी ने दो जगहों पर अपनी अलग-अलग पत्नियों के साथ वोट दिया था. पहली पत्नी के पास मौजूद सम्पत्ति का खुलासा भी नहीं किए थे. इस पर सुनवाई करते हुए जब कोर्ट यह जानना चाहा कि उनकी कितनी पत्नियां है. इसके जवाब में मंगनी लाल ने कहा कि उनकी कितनी पत्नियां हैं वह नहीं जानते हैं. हालांकि बाद में उन्होंने कहा था कि उनकी दो पत्नी हैं.
मंगनी लाल मंडल के चुनावी हलफनामे के अनुसार वर्ष 2009 में उनकी सम्पत्ति 53 लाख रुपए के आसपास थी. वहीं पांच साल के बाद सम्पत्ति बनाने के मामले में मंगनी लाल मंडल ने पांच साल में 15 गुणा की तेजी से करोड़ों की सम्पत्ति अर्जित की. 2014 में उनकी संपत्ति बढ़कर 7 करोड़ 69 लाख रुपए की हो गई. एक तरह से देखा जा जाए तो यह पांच साल में 15 गुणा की बढ़ोत्तरी थी. लोकसभा चुनाव 2014 के पहले मंगनी लाल मंडल अपनी ही पत्नी से मारपीट के आरोपों को लेकर विवादों में घिरे थे. वर्ष 2013 में जब वे अपने पैतृक गांव फुलपरास गए थे तब उनकी पहली पत्नी और बेटे के साथ कहासुनी हुई जो कथित रूप से मारपीट तक आई. इसे लेकर थाने में मामला भी दर्ज हुआ.
सवाल ये उठ रहा है कि ऐसे गंभीर आरोपों से घिरे नेता मंगनीलाल मंडल के हाथ मे पार्टी की कमान देकर तेजस्वी यादव क्या साबित करना चाहते हैं. क्या ऐसे नेताओं के जरिए तेजस्वी राज की नीति की स्थापना कारेगें या वो फिर किसी भी कीमत पर राज पर काबिज होने की राजनीति को ही आगे बढ़ाना चाहते हैं .आलोक मेहता से मंगनीलाल मंडल की तुलना की जा रही है. ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या मंगनीलाल मंडल के दाग आलोक मेहता के दाग से अच्छे हैं .