3 करोड़ बिहारियों के नाम काटने की साजिश:तेजस्वी .

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Bihar News:

सिटी पोस्ट लाइव : तेजस्वी यादव ने निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग खुद कंफ्यूज है और लगातार समय, तिथि और पुनरीक्षण को लेकर अपने आदेश बदल रहा है. हर सप्ताह नए आदेश जारी किए जा रहे हैं, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पूरी रणनीति किसी राजनीतिक दल से साझा की गई है. चुनाव आयोग से समय मांगा गया है, लेकिन अभी तक कोई समय नहीं दिया गया है. इतने गंभीर मुद्दे पर भी आयोग गंभीर नहीं है और हमारे द्वारा लगातार सवाल उठाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिल रहा है.

तेजस्वी ने कहा कि जो 11 डॉक्यूमेंट मांगे गए हैं, वे बिहार के पास नहीं हैं और दी गई दलीलें उदासीनता को दर्शाती हैं. ठीक दो महीने पहले वोटर लिस्ट बदलने का क्या कारण है, इस पर भी सवाल उठाए गए हैं. उन्होंने मीडिया के सामने डॉक्यूमेंट भी गिनाए. तेजस्वी ने यह भी सवाल उठाया कि यह पुनरीक्षण सिर्फ पूरे देश में क्यों नहीं हो रहा है और पूरी प्रक्रिया दो साल पहले क्यों नहीं शुरू हुई.

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तेजस्वी यादव ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद भी प्रक्रिया शुरू नहीं की गई. अगर फर्जी वोटर आए हैं, तो पहले प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू हुई. BLO को तीन बार मतदाता के पते पर जाने का निर्देश दिया गया है और मतदाता को भौतिक रूप से उपस्थित रहना पड़ेगा. जो लोग रोजी-रोटी कमाने या मजदूरी करने बाहर जाते हैं, वे चुनाव के दौरान कैसे आएंगे? अचानक पहचान के लिए कैसे आयेंगे? तीन करोड़ लोग पलायन कर मजदूरी करने बाहर जाते हैं . ऐसे सभी लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा, जिनमें अधिकांश दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग हैं.

2004 के बाद वाले मतदाताओं को माता-पिता का पहचान पत्र देना होगा, जबकि आधार और नरेगा कार्ड की मान्यता नहीं दी गई है. तेजस्वी ने निर्वाचन आयोग से पूछा कि कितने लोगों के पास ये दस्तावेज हैं. भारत सरकार को भी यह बताना चाहिए कि 11 दस्तावेज कितने बिहारियों के पास हैं और कितने प्रतिशत लोगों के पास पूरे दस्तावेज हैं. जन्म प्रमाण पत्र कितने प्रतिशत लोगों के पास हैं, मान्यता प्राप्त बोर्ड द्वारा मैट्रिक प्रमाण पत्र कितने लोगों के पास हैं, और जातीय प्रमाण पत्र कितने लोगों को निर्गत किए गए हैं, इसका आंकड़ा सरकार जारी करे.

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