बिहार चुनाव 2025: क्या है विपक्षी दलों की आपत्ति और
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सिटी पोस्ट लाइव : चुनाव आयोग के विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण को लेकर आम लोगों के मन में भी कई तरह की आशंकाएं हैं.ज्यादातर लोगों के पास कागजात नहीं हैं ज्यादातर लोग अशिक्षित हैं. उनके पास कोई डॉक्यूमेंट नहीं हैं. आधार कार्ड तक नहीं है. बिहार की समस्त मतदाता सूची को निरस्त कर केवल 25 दिन में 1987 से पूर्व के कागजी सबूतों के साथ नई मतदाता सूची बनाने का निर्देश आम लोगों की समझ में नहीं आ रहा है.दरअसल, बीजेपी की चिंता बांग्लादेश और रोहिंग्या को लेकर है. मतदाता गहन पुनरीक्षण के जरिये वह ऐसे लोगों को voter list से बाहर करना चाहती है.लेकिन इस प्रक्रिया की वजह से बिहार की एक बड़ी आबादी की पॉलिटिकल सिटिज़नशिप पर आफ़त आ सकती है.विपक्ष इसे एनआरसी को बैकडोर से लागू करने की कवायद मानकर चल रहा है.उसे डर है कि सरकार के इस कदम से लोग ख़ासतौर पर हाशिए की आबादी वोटिंग के अधिकार से वंचित होगी.”इमेज कैप्शन,कोई भी व्यक्ति चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर यह फॉर्म डाउनलोड करके उसे भर सकता है
एसआईआर दो तरीके से होगा. पहला बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर, एक प्री-फील्ड फॉर्म गणना प्रपत्र (मतदाता की जानकारी और दस्तावेज) लेकर जाएंगे.दूसरा कोई भी व्यक्ति चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर यह फॉर्म डाउनलोड करके उसे भर सकता है.यहां प्री-फील्ड फ़ॉर्म का मतलब है कि वोटर के बारे में जानकारी पहले से ही फ़ॉर्म में भरी होगी.बीएलओ सिर्फ़ उनका वेरिफ़िकेशन करेगा. साथ ही अगर ज़रूरत होगी तो व्यक्ति को आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने होंगे.प्री फील्ड फ़ॉर्म का आधार, इसी साल 7 जनवरी को चुनाव आयोग की ओर से घोषित मतदाताओं की प्रकाशित ‘अंतिम सूची’ है.7 जनवरी को प्रकाशित हुई इस सूची के मुताबिक, बिहार में कुल 7 करोड़ 80 लाख 22 हजार 933 मतदाता हैं जिनमें 3 करोड़ 72 लाख 57 हजार 477 महिलाएं, 4 करोड़ 7 लाख 63 हजार 352 पुरुष और 2 हजार 104 थर्ड जेंडर हैं.चुनाव आयोग ने 11 दस्तावेजों की सूची जारी की है जिनमें से किसी एक दस्तावेज को गणना प्रपत्र के साथ लगाना होगा.
महादलित समुदाय के बीच अपने ज़मीनी काम के लिए सुधा वर्गीज़ को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है .उनका कहना है कि आधार कार्ड को एसआईआर के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ों में मान्यता नहीं मिली है.ये फ़ैसला अलोकतांत्रिक है और बिहार की ज़मीनी परिस्थितियों के हिसाब से ठीक नहीं है. साल 2003 में एसआईआर में डेढ़ साल लगे थे. अबकी बार ये एक माह में हो जाएगी?” अनुसूचित जाति (बिहार में महादलित) के लोग गरीब हैं. उनके पास ज़मीन नहीं है, पढ़ाई लिखाई नहीं है और कोई डॉक्यूमेंट नहीं है. सरकार उनको वोटिंग के संवैधानिक अधिकार से कैसे बाहर कर सकती है?”
दरअसल अगर बिहार को आंकड़ों में देखें तो ये देश का सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित राज्य है. राज्य के भूगोल का 73 फ़ीसदी हिस्सा बाढ़ प्रभावित रहता है.सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में 21 दिन के भीतर जन्म का रजिस्ट्रेशन सिर्फ़ 71.6 प्रतिशत लोगों ने किया. जन्म का रजिस्ट्रेशन 21 दिन के भीतर करने से यह नि:शुल्क होता है.इसी तरह शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो बिहार सरकार के जातीय सर्वे के मुताबिक सामान्य वर्ग में 17.45, ओबीसी में 21.69, ईबीसी में 24.65, एससी में 24.31, एसटी में 24.52, अन्य जातियों में 18.32 फ़ीसदी लोगों ने सिर्फ़ पहली कक्षा से पांचवी तक पढ़ाई की है. राज्य में ऐसे लोगों की संख्या 22.67 फ़ीसदी है.इसी तरह नौवीं और दसवीं की पढ़ाई का आंकड़ा देखें तो बिहार में महज़ 15 फ़ीसदी से भी कम लोगों ने मैट्रिक पास की है.इसी तरह ग्रेजुएट सिर्फ़ 6.11 फ़ीसदी और पोस्ट ग्रेजुएट सिर्फ़ 0.82 फ़ीसदी लोग हैं. वहीं आवासीय स्थिति के मोर्चे पर भी बिहार बदहाल है.
आवासीय स्थिति को जानना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दस्तावेज़ों में घर या जमीन का प्रमाण पत्र भी मांगा गया है.सरकार के सर्वे के मुताबिक, सिर्फ़ 60 फ़ीसदी लोगों के पास ही पक्के मकान हैं. राज्य में 26.54 फ़ीसदी लोग टीन या खपरैल की छत के नीचे और 14.09 फ़ीसदी झोपड़ी में रहते हैं. वहीं 0.24 फ़ीसदी लोगों के पास घर ही नहीं है.साल 2024-25 के बिहार आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, “31 मार्च 2024 तक देश की कुल बैंक शाखाओं में बिहार का हिस्सा 4.9 फ़ीसदी था जो राष्ट्रीय आबादी में राज्य के हिस्से से कम है. यानी बिहार में देश के अन्य भागों की तुलना में प्रति बैंक शाखा अधिक लोग हैं.”
चुनाव आयोग ने जो दस्तावेज मांगे हैं, उसकी जमीनी स्थिति साफ़ तौर पर बदहाल है. साथ ही इन आंकड़ों में भी सबसे बदतर स्थिति महादलितों की है.पहला तो यह कि जिन वोटर का एसआईआर साल 2003 की प्रक्रिया में हो चुका है, उनको किसी तरह के दस्तावेज़ की जरूरत नहीं है.इससे तकरीबन 60 फ़ीसदी मतदाताओं यानी 4.96 करोड़ को कोई दस्तावेज़ नहीं जमा करना होगा.सोमवार (30 जून) को आयोग ने इस बात की भी घोषणा की कि साल 2003 के बाद शामिल हुए वोटर्स, जिनके माता-पिता के नाम साल 2003 में हुए एसआईआर के बाद मतदाता सूची में शामिल थे, उनको भी किसी तरह के दस्तावेज़ जमा करने की जरूरत नहीं है.साथ ही यह भी तय किया गया है कि अधिकतम 1200 वोटर्स पर एक बूथ होगा.एसआईआर करने के लिए 98 हजार 498 बूथ लेवल ऑफिसर की नियुक्ति की गई है. इन बीएलओ की मदद के लिए राज्य में ढाई लाख वॉलेंटियर काम करेंगें. ये विकास मित्र, आंगनबाड़ी, जीविका दीदी, एनएसएस, एनसीसी कैडेट आदि होंगे.