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एम्स दिल्ली ने एक खास ऐप लॉन्च किया है। यह ऐप सुसाइड केस को रोकने के लिए बहुत ही कारगर माना जा रहा है। आइए जानते है ये ऐप क्यों है इतना खास।
बढ़ते आत्महत्या को देखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली ने एक खास ऐप लॉन्च किया है। इस ऐप(Never Alone) का उद्देश्य छात्रों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों को रोकना और मेंटल हेल्थ को बढ़ावा देना है। वहीं, वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे पर इस ऐप को लॉन्च किया गया है। यह एक तरह का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऐप है। इसमें मानसिक स्वास्थ्य की जांच, वर्चुअल और ऑफलाइन काउंसलिंग और लगातार फॉलो-अप का सिस्टम शामिल किया गया है। बता दें, दिल्ली के अलावा यह प्रोग्राम AIIMS भुवनेश्वर और IHBAS शाहदरा में भी शुरू किया गया है।
AIIMS द्वारा बनाए गए “Never Alone” ऐप की खास बातें:
– यह एक वेब-बेस्ड पूरी तरह सुरक्षित ऐप है जिसे WhatsApp के जरिए 24×7 एक्सेस किया जा सकता है।
– छात्र इसमें मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स से ऑनलाइन और ऑफलाइन सलाह ले सकते हैं।
– मानसिक स्वास्थ्य की शुरुआती जांच हर छात्र के लिए सिर्फ 70 पैसे प्रतिदिन में उपलब्ध है।
– इस सेवा का लाभ उठाने के लिए संस्थानों को AIIMS दिल्ली से संपर्क करना होगा और सेवा को सब्सक्राइब करना होगा।
– यह सेवा सभी AIIMS संस्थानों को बिना किसी आर्थिक शुल्क के दी जाएगी, जिसे Global Centre of Integrative Health (GCIH) के जरिए संचालित किया जाएगा।
– GCIH एक गैर-लाभकारी पहल है, जिसे प्रसिद्ध लेखक और AIIMS दिल्ली के पूर्व छात्र डॉ. दीपक चोपड़ा का सहयोग प्राप्त है।
गौरतलब है कि आत्महत्या और मानसिक बीमारियों (जैसे डिप्रेशन और शराब की लत) के बीच गहरा संबंध है। वहीं, 70–80 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो मानसिक समस्याओं के बावजूद भी इलाज नहीं ले पाते है। इसकी सबसे बड़ी वजह जानकारी की कमी और सामाजिक कलंक है। सुसाइड को लेकर WHO के चौंकाने वाला आंकड़ा कहता है कि हर 45 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान गंवाता है। NCRB के अनुसार, भारत में 2022 में 1,70,924 लोगों ने आत्महत्या की, जो पिछले 56 सालों में सबसे ज्यादा है। साथ ही कुल आत्महत्याओं में 35 प्रतिशत में 18 से 30 साल के युवा थे। और 30 से 45 साल की उम्र के लोग का हिस्सा 32 प्रतिशत रहा। आजकल के समय में छात्रों में आत्महत्या की प्रवृत्ति एक गंभीर चिंता का विषय है।