मतदाता सूचीके विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से बदल जाएगा जीत-हार का समीकरण.

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Bihar SIR:

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची से अब तक 35.5 लाख से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं. यह आंकड़ा 70 लाख के पार जा सकता है क्योंकि अभीतक लगभग 11 फीसदी लोगों ने फॉर्म जमा नहीं किया है. इस प्रक्रिया ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है. खासकर विपक्षी महागठबंधन ने इसे गरीब, दलित और प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाने की साजिश करार दिया है.इसमे शक की कोई गुंजाइश नहीं कि है यह प्रक्रिया तेजस्यावी यादव के यादव , मुस्लिम और दलित वोट बैंक पर असर डालेगा. दूसरी ओर, एनडीए को कम नुकसान होने की संभावना है क्योंकि उनका वोट आधार शहरी और मध्यम वर्गीय है जहां ग्रामीण मतदाताओं की तुलना में डॉक्यूमेंटेशन बेहतर है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 35.5 लाख (4.52%) नाम हटाए जा चुके हैं. इनमें 12.55 लाख मृत, 17.37 लाख स्थानांतरित और 5.76 लाख दोहरे पंजीकरण वाले हैं. यह संख्या 70 लाख तक पहुंच सकती है जो कुल मतदाताओं का लगभग 9% है. ऐसे में यह कटौती बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर औसतन 28,000 से अधिक मतदाता प्रति सीट प्रभावित कर सकती है जो 2020 के चुनाव में कई सीटों पर जीत-हार के अंतर से कहीं ज्यादा है. यह कटौती अगर 70 लाख तक पहुंचती है तो महागठबंधन की रणनीति को कमजोर कर सकती है, जबकि एनडीए को अपेक्षाकृत लाभ मिल सकता है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई से सियासी समीकरण और बदल सकते हैं. 

विपक्षी महागठबंधन इस प्रक्रिया को गरीब, दलित और प्रवासी मजदूरों के वोटिंग अधिकारों पर हमला बता रहा है. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने चेतावनी दी कि 1% कटौती भी प्रति सीट 3,200 मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है जो 2020 में 35 सीटों के अंतर से अधिक है. RJD का वोट बैंक मुख्य रूप से यादव, मुस्लिम और दलित समुदायों पर निर्भर है जो ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों जैसे- सीमांचल और कोसी में ज्यादा हैं. इन क्षेत्रों में दस्तावेजों की कमी और प्रवास की अधिकता के कारण मतदाता सूची से नाम हटने की संभावना ज्यादा है. उदाहरण के लिए, किशनगंज, अररिया और पूर्णिया जैसे जिलों में आधार कार्ड धारकों की संख्या आबादी से अधिक पाई गई जिसे फर्जी या अपात्र मतदाताओं का संकेत माना गया.इसके विपरीत, एनडीए (BJP-JDU) का वोट बैंक अपेक्षाकृत शहरी और मध्यम वर्गीय है जो दस्तावेजीकरण में बेहतर स्थिति में है. शहरी क्षेत्रों में विशेष शिविरों और ECINET पोर्टल के जरिए मतदाता पंजीकरण को आसान बनाया गया है जिसका लाभ एनडीए समर्थकों को मिल सकता है. सोशल मीडिया पर कुछ दावे हैं कि यह प्रक्रिया BJP के पक्ष में हो सकती है, क्योंकि उनके मतदाता आधार को कम नुकसान होने की संभावना है.

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हालांकि, कांग्रेस और अन्य छोटे सहयोगी दल भी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि उनका दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक भी ग्रामीण क्षेत्रों में है. पप्पू यादव जैसे नेताओं की सीमांचल में मजबूत पकड़ को झटका लग सकता है, अगर उनके समर्थक मतदाता सूची से बाहर हो जाते हैं. दूसरी ओर JDU और BJP की संगठनात्मक ताकत और शहरी-मध्यम वर्गीय मतदाताओं पर निर्भरता उन्हें इस कटौती से कम प्रभावित कर सकती है. महागठबंधन, खासकर RJD, को इस कटौती से सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है, क्योंकि उनका वोट बैंक उन समुदायों में है जो दस्तावेजीकरण और जागरूकता की कमी से प्रभावित हो सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई और विपक्ष के विरोध से यह मुद्दा और गर्मा सकता है.

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