बिहार में सीएजी रिपोर्ट पर बवाल, ₹71,000 करोड़ के हिसाब को लेकर पोस्टर वार

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने सियासी गलियारों में तूफान ला दिया है। रिपोर्ट में राज्य सरकार के ₹71,000 करोड़ रुपये से अधिक के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जमा न होने पर सवाल उठाए गए हैं। इस खुलासे के बाद, विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इसे “महाघोटाला” करार दिया है और राज्य सरकार पर हमलावर हो गया है।

रिपोर्ट सामने आने के बाद, राजधानी पटना में एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो गया है, जिसे ‘पोस्टर वार’ के नाम से जाना जा रहा है। राजद ने पटना के इनकम टैक्स चौराहे और पार्टी कार्यालय के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों में मंत्रियों और उनके विभागों को निशाना बनाया गया है, जिन पर CAG ने सवाल उठाए हैं। पोस्टर में बीच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर लगाकर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि यह घोटाला दोनों के शासन में हुआ है।

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

इन पोस्टरों में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि जनता के पैसों की लूट हुई है। राजद के इस कदम से एनडीए गठबंधन (NDA) में भी हड़कंप मच गया है। सरकार की तरफ से वित्त मंत्री और उपमुख्यमंत्री ने सफाई देते हुए इस रिपोर्ट को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह रिपोर्ट उस समय से संबंधित है जब राजद महागठबंधन का हिस्सा थी और तेजस्वी यादव स्वयं उपमुख्यमंत्री थे।

यह पोस्टर वार इस बात का प्रमाण है कि बिहार में राजनीति अब हर छोटे-बड़े मुद्दे को चुनावों में भुनाने की कोशिश कर रही है। चाहे वह महागठबंधन हो या एनडीए, दोनों दल एक-दूसरे को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। दोनों पक्षों द्वारा लगाए जा रहे पोस्टर जनता के बीच एक अलग तरह का संदेश फैला रहे हैं, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है।

संवाददाता मरगूब आलम की रिपोर्ट के अनुसार, CAG रिपोर्ट ने न केवल वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक दलों को एक नया हथियार भी दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मामले से कैसे निपटती है और क्या विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच प्रभावी ढंग से ले जा पाएगा।

Share This Article