पटना AIIMS में फर्जीवाड़े का खुलासा: दो डॉक्टरों के नामांकन मामले में सीबीआई जांच शुरू

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
पटना स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी लेने का मामला सामने आने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। सीबीआई की एक टीम आज पटना एम्स पहुंचकर मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी।

यह मामला तब सामने आया जब दानापुर के एक अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, कुमार हर्षित राज और कुमार सिद्धार्थ नामक दो अभ्यर्थियों का चयन फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर हुआ था। इन दोनों पर पटना सदर के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) द्वारा जारी किए गए जाली प्रमाणपत्रों का उपयोग करने का आरोप है।

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इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों चयनित अभ्यर्थी तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. बिंदे कुमार और रेडियोलॉजी के डीन डॉ. प्रेम के पुत्र हैं। इस हाई-प्रोफाइल केस ने एम्स प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीबीआई ने इस मामले में दोनों अभ्यर्थियों के साथ-साथ अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। जांच का जिम्मा सीबीआई के डीएसपी सुरेंद्र देपावत को सौंपा गया है। सीबीआई की टीम एम्स में नामांकन से संबंधित सभी फाइलें, फुटेज और अन्य सबूतों की गहनता से जांच करेगी ताकि इस फर्जीवाड़े की तह तक पहुंचा जा सके।

यह मामला चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार को उजागर करता है और यह दर्शाता है कि कैसे कुछ प्रभावशाली लोग अपने पद का दुरुपयोग कर अपने रिश्तेदारों को गलत तरीके से प्रवेश दिलाने में सफल हो जाते हैं। सीबीआई की इस जांच से उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका जा सकेगा।

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