राहुल ने कम कर दी तेजस्वी की चुनौती, पप्पू-कन्हैया को तेजस्वी के साथ खड़ा किया.

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राहुल गांधी ने तैयार कर दी तेजस्वी यादव की चुनावी पिच! वोटर

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सिटी पोस्ट लाइव :कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के जरिए न सिर्फ विपक्षी एकता को मजबूत किया, बल्कि आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की ‘पिच’ भी तैयार कर दी है. तेजस्वी, जो बिहार में मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं, अब गठबंधन के अन्य नेताओं के साथ सहज दिख रहे हैं. खासकर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और पूर्व जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के साथ पुरानी खटास अब लगभग खत्म हो चुकी है.राहुल गांधी की यात्रा बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ के आरोप लगा रहे हैं. यह यात्रा 17 अगस्त 2025 को सासाराम से शुरू हुई और एक सितंबर को पटना में रोड मार्च से समाप्त होगी. कुल 1,300 किलोमीटर लंबी यह यात्रा 20 से अधिक जिलों तक पहुंचेगी. राहुल गांधी इसकी अगुआई कर रहे हैं, जबकि तेजस्वी यादव उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रहे हैं. यात्रा का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट में कथित धांधली को उजागर करना है.

राहुल के अनुसार ‘चुनाव आयोग का काम सही वोटर लिस्ट देना है, लेकिन महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक में उन्होंने यह काम नहीं किया. बिहार में भी वोट चोरी का प्रयास चल रहा है. तेजस्वी ने इसे ‘अस्तित्व की लड़ाई’ बताया, कहा- ‘ये लोग आपसे सिर्फ वोट अधिकार नहीं छीन रहे, आपका अस्तित्व छीनना चाहते हैं.‘ यात्रा में लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है. प्रियंका गांधी का बिहार में पहला सियासी कार्यक्रम इसी यात्रा में हुआ. लेकिन सबसे बड़ा ट्विस्ट पप्पू यादव और कन्हैया कुमार का शामिल होना है, जिनके साथ राजद के रिश्ते पहले तल्ख थे.

2024 लोकसभा चुनाव में पूर्णिया सीट पर आरजेडी ने पप्पू यादव को कांग्रेस के टिकट चुनाव नहीं लड़ने दिया था.. इससे पप्पू नाराज हो गए. उन्होंने तेजस्वी को ‘अनुभवहीन’ और ‘परिवारवाद’ का प्रतीक बताया था. इसके अलावा, जुलाई 2025 में पटना में बिहार बंद के दौरान पप्पू को राहुल-तेजस्वी की ओपन जीप पर चढ़ने से रोक दिया गया था. पप्पू की सक्रियता आरजेडी के वोट बैंक को प्रभावित कर रही थी. लेकिन ‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने सब बदल दिया. 24 अगस्त 2025 को अररिया पहुंची यात्रा के दौरान पप्पू यादव तेजस्वी की गाड़ी पर सवार हुए. मंच पर उन्होंने तेजस्वी की जम कर तारीफ की, कहा- जननायक और मेरे भाई तेजस्वी यादव नफरत और आतंक को खत्म करने में लगे हैं.‘ तेजस्वी ने भी पप्पू का स्वागत किया. यह दृश्य ऐतिहासिक था, क्योंकि कभी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने वाले ये दोनों नेता अब एक मंच पर खड़े थे. इसे राहुल का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है. अब खटास खत्म होने से महागठबंधन का पिछड़ा वोट बैंक मजबूत होगा.

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार कांग्रेस का चर्चित युवा चेहरा हैं. बिहार में युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं. लेकिन राजद के साथ उनके रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. जुलाई 2025 के बिहार बंद में कन्हैया को भी राहुल-तेजस्वी के रथ पर चढ़ने से रोका गया था. वीडियो वायरल होने पर कन्हैया ने कहा था- ‘यह गठबंधन की आंतरिक खींचतान दिखाता है.‘ तेजस्वी को कन्हैया की बढ़ती सक्रियता रास नहीं आ रही थी, क्योंकि यह राजद के युवा वोट बैंक को चुनौती दे रही थी. यात्रा में राहुल ने कन्हैया को प्रमुखता दी. मुंगेर और भागलपुर में कन्हैया ने राहुल के साथ मंच साझा किया. तेजस्वी ने कन्हैया का सम्मान किया. अब कन्हैया को गरिमा के साथ यात्रा में शामिल किया जा रहा है. यह बदलाव राहुल की रणनीति का हिस्सा लगता है, जो बिहार कांग्रेस को मजबूत करना चाहते हैं. कन्हैया की पैठ से युवा वोटरों को जोड़ा जा सकेगा. नवादा में तेजस्वी ने राहुल को ‘प्रधानमंत्री’ घोषित किया, लेकिन पूर्णिया में राहुल ने तेजस्वी को सीएम फेस बनाने पर चुप्पी साधी. उन्होंने कहा- गठबंधन अच्छा चल रहा है, कोई टेंशन नहीं. यानी कन्हैया और तेजस्वी के करीब आने से महागठबंधन को मजबूती तो मिलेगी ही, तल्खी भी खत्म हो जाएगी.

पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को लेकर तेजस्वी या उनके पिता लालू प्रसाद यादव कभी सहज नहीं रहे. कन्हैया कुमार ने लालू की मर्जी के खिलाफ बेगूसराय से सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़ा था. पप्पू यादव को तो तेजस्वी ने लोकसभा चुनाव के दौरान अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान लिया था. पप्पू को हराने के लिए तेजस्वी ने लोगों से एनडीए के पक्ष में वोट देने की अपील की थी. पप्पू ने भी मौके-बेमौके उन्हें खरी-खोटी सुनाने में संकोच नहीं किया. राहुल की यात्रा का विपक्ष के लिए सबसे बड़ा हासिल यही है कि रिश्तों पर जमी बर्फ अब पिघल गई है, जो तेजस्वी के लिए सुखद बात है.जहांतक चुनौती की बात है मुकाबला कांटे का है.कौन जीतेगा और कौन हारेगा अभी बता पाना मुश्किल है.

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