पितृ पक्ष 2025: जानें कब से शुरू होगा श्राद्ध पक्ष और कब तक चलेगा…

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव

हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। इस बार पितृ पक्ष 7 सितंबर 2025, रविवार से शुरू हो रहा है। इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं। दरअसल, इस साल 7 सितंबर,2025 से पितृ पक्ष की शुरूआत हो रहा है। और समापन 21 सितंबर,2025 को होगा। वहीं, इसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है।
पितृ पक्ष 2025 तिथियां:-
1) पूर्णिमा श्राद्ध – रविवार, 7 सितंबर 2025
2) प्रतिपदा तिथि श्राद्ध- सोमवार 8 सितंबर 2025
3) श्राद्ध का दूसरा दिन – मंगलवार 9 सितंबर 2025
4) तीसरे दिन का श्राद्ध / चौथे दिन का श्राद्ध – बुधवार, 10 सितंबर
5) भरणी तिथि और पंचमी तिथि श्राद्ध- गुरुवार 11 सितंबर
6) षष्ठी तिथि श्राद्ध – शुक्रवार 12 सितंबर 2025
7) सप्तमी तिथि श्राद्ध- शनिवार 13 सितंबर 2025
8) अष्टमी तिथि श्राद्ध – रविवार 14 सितंबर 2025
9) नवमी तिथि श्राद्ध- सोमवार 15 सितंबर 2025
10) दशमी तिथि श्राद्ध – मंगलवार 16 सितंबर 2025
11)एकादशी तिथि श्राद्ध-बुधवार 17 सितंबर 2025
12) द्वादशी तिथि को श्राद्ध – गुरुवार 18 सितंबर 2025
13) त्रयोदशी तिथि/माघ श्राद्ध – शुक्रवार 19 सितंबर 2025
14) चतुर्दशी तिथि श्राद्ध- शनिवार 20 सितंबर 2025
15) सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध – 21 सितंबर 2025 रविवार को किया जाएगा
पितृ पक्ष में क्या करें और किन बातों का रखें ध्यान:-
इस अवधि में रोजाना स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दें और अपने पितरों का स्मरण करें। और तर्पण व पिंडदान ब्राह्मण या योग्य पंडित की मार्गदर्शन में करें। वहीं, श्राद्ध के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन व दान देना शुभ माना जाता है। साथ हीं घर में सादा व सात्विक भोजन बनाएँ। मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहें। इसमें पक्षियों व गायों को अनाज, रोटी और जल देना शुभ माना जाता है।
क्या न करें:-
1. पितृ पक्ष में विवाह, नए कपड़े, घर-गाड़ी जैसी बड़ी खरीदारी या कोई नया कार्य आरंभ करना वर्जित माना जाता है।
2. किसी को अपशब्द, अपमान या कष्ट पहुँचाना भी अशुभ फल देता है।

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हालांकि, वार्षिक श्राद्ध की तिथि कैसे ज्ञात करने के लिए सबसे पहले श्राद्ध की तिथि का निर्धारण करें। यह परिवार के सदस्य की मृत्यु की तिथि से होता है। अर्थात, पितृ पक्ष में जिस तिथि और समय पर व्यक्ति ने अंतिम सांस ली हो, उसी तिथि और समय पर श्राद्ध करना चाहिए। यदि तिथि ज्ञात न हो, तो ऐसे में पितृ अमावस्याओं पर श्राद्ध करना चाहिए।

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