सिटी पोस्ट लाइव : लालू प्रसाद यादव ने बिहार की सियासत को अपने करिश्माई नेतृत्व और मुस्लिम-यादव समीकरण से 15 साल राज किया. पत्नी राबड़ी देवी को CM और बेटे को डिप्टी सीएम बनाया.अपने MY समीकरण के बदौलत आज भी वह बिहार की सियासत के धुरी बने हुए हैं, लेकिन अब चुनाव के ठीक मुहाने पर लालू उम्र के ढलान पर हैं तो उनके दोनों बेटों तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच दबे पांव सत्ता की जंग छिड़ चुकी है.तेजस्वी RJD के भविष्य हैं, जिन्हें लालू ने अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है. तेज प्रताप अपनी अलग पहचान बनाने को बेताब हैं, लेकिन उनके विवादास्पद बयान उन्हें बार-बार मुश्किल में डाल रहे हैं.
बिहार की सियासत में तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच उभरता टकराव किसी बॉलीवुड फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है. यह कहानी न केवल राजनीतिक है, बल्कि पारिवारिक, भावनात्मक और सत्ता के संघर्ष की भी है.18 अगस्त की रात 11.58 बजे तेज प्रताप यादव के ऐलान से अब तस्वीर साफ है कि वह अक्टूबर-नवंबर में संभावित विधानसभा चुनाव में छोटे भाई तेजस्वी के सारथी नहीं, आमने-समाने होंगे. इसके लिए उन्होंने अपनी नई पार्टी बना ली है. नाम रखा है जनशक्ति जनता दल.
तेजप्रताप ने अपनी पार्टी तो बना ली है लेकिन फिर वो पीछे हटाते दिखाई दे रहे हैं.अब वो कह रहे हैं कि उन्होंने कोई पार्टी नहीं बनाई है.उनका संगठन टीम तेजप्रताप है.उसी के साथ छोटे छोटे दल आ रहे हैं.एक तरफ वो तीसरा मोर्चा बनाते हुए दिखाई दे रहे हैं दूसरी तरफ निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं.मतलब साफ़ है तेजप्रताप सबकुछ तेजस्वी पर प्रेशर बनाने के लिए कर रहे हैं.वो अपनी पार्टी बनाने के वावजूद चुनाव लड़ने और लड़ाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं.
तेज प्रताप के पास भले अपना तेजस्वी की तरह कोई मजबूत जनाधार नहीं है. और ना ही उनके पास अपना कोई राज्य व्यापी संगठन है. लेकिन जिस तरह वह अपनी छवि लालू की तरह गढ़ने का प्रयास कर रहे हैं, इससे RJD के कोर वोट बैंक में कुछ सेंधमारी जरूर कर सकते हैं. इसका सीधा नुकसान तेजस्वी को होगा. 2020 विधानसभा चुनाव के करीबी नतीजों (NDA से सिर्फ 0.23% वोट शेयर कम) को देखते हुए निर्णायक हो सकता है.2019 लोकसभा चुनाव के दौरान तेज प्रताप जहानाबाद और शिवहर सीट से अपने करीबियों को मैदान में उतारना चाहते थे. टिकट को लेकर खूब जोर-अजमाइश की, लेकिन नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने दोनों जगहों से निर्दलीय अपना प्रत्याशी उतार दिया.हालांकि, शिवहर के प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो गया. सिर्फ जहानाबाद से तेज के करीबी चंद्र प्रकाश ही चुनाव लड़े. RJD के सुरेंद्र प्रसाद यादव 1,751 वोटों से चुनाव हार गए. चुनाव बाद कहा गया कि अगर तेज प्रताप ने वहां अपना प्रत्याशी नहीं दिया होता तो RJD चुनाव जीत जाती.