राहुल गांधी की यात्रा से पहले राजद-कांग्रेस में रार: पोस्टर विवाद पर FIR दर्ज, उजागर हुई महागठबंधन की कलह

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
लोकसभा चुनाव से पहले जहां एक ओर ‘इंडिया’ गठबंधन एकजुटता का दावा कर रहा है, वहीं बिहार के मोतिहारी में इसके दो प्रमुख घटक दलों- कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच की आपसी कलह खुलकर सामने आ गई है। यह विवाद अब इतना बढ़ गया है कि कांग्रेस के एक नेता ने मोतिहारी की मेयर और राजद नेता उनके पति समेत चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है।

पोस्टर लगाने पर शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद ‘वोट अधिकार यात्रा’ से जुड़ा है, जो ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा मोतिहारी में आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम के लिए लगाए गए पोस्टरों को लेकर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव शुरू हो गया। कांग्रेस का आरोप है कि उनके पोस्टर हटाकर राजद के पोस्टर लगा दिए गए, जिस पर विवाद गहरा गया।

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कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशिभूषण राय के मीडिया प्रभारी अनुराग तिवारी ने मोतिहारी की मेयर प्रीति गुप्ता, उनके पति और राजद नेता देवा गुप्ता, उनके सहयोगी सुगंध गुप्ता और चिंटू यादव के साथ-साथ 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि जब कांग्रेस नेताओं ने पोस्टर हटाने का विरोध किया, तो उन्हें मारपीट की धमकी दी गई।

लंबे समय से चली आ रही है राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
भले ही कांग्रेस और राजद बिहार में एक साथ सरकार चला रहे हों और गठबंधन में हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मोतिहारी में दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच यह गहरी असहमति और खींचतान अब सार्वजनिक रूप ले चुकी है।

इस विवाद की जड़ें दोनों परिवारों की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में छिपी हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशिभूषण राय की पत्नी ममता राय जिला परिषद की अध्यक्षा हैं, जबकि राजद नेता देवा गुप्ता की पत्नी प्रीति गुप्ता मोतिहारी की मेयर हैं। दोनों परिवारों के बीच की प्रतिद्वंद्विता अब इस तरह के छोटे-मोटे मुद्दों पर खुलकर सामने आ रही है, जो गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाती है।

गठबंधन की आंतरिक कलह उजागर
इस घटना ने महागठबंधन की आंतरिक कलह को उजागर कर दिया है, खासकर ऐसे समय में जब राहुल गांधी की प्रस्तावित ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ जल्द ही बिहार पहुंचने वाली है। यह विवाद न केवल दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित कर सकता है, बल्कि आगामी चुनावों में गठबंधन की रणनीति और सीटों के बंटवारे पर भी इसका असर पड़ सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों दलों के शीर्ष नेता इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं, ताकि लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन की छवि को और नुकसान न हो।

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