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नवरात्रि में गाय के गोबर का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, हवन और पूजा कार्यों में भी इसका विशेष महत्व होता है। आइए जानते है इसके पीछे की वजह और महत्व क्या है।
हिंदू धर्म में पूजा के बाद होने वाले हवन में खास सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है, तभी पूजा संपन्न मानी जाती है। इसमें गाय का गोबर भी शामिल रहता है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में पवित्रता बनी रहती है। इसके साथ ही चैत्र नवरात्रि में रोजाना हवन के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि में पूजा के बाद हवन के लिए गाय के गोबर का उपला रखा जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, गाय के पिछले हिस्से को शुद्ध माना जाता है। इसी कारण से पूजा में गाय के गोबर का इस्तेमाल किया जाता है। इसके इस्तेमाल से हवन करने से घर में सकारात्मकता ऊर्जा बनी रहती है। और वातावरण भी शुद्ध रहता है। साथ ही माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि, हवन करने के लिए आपको आम की लकड़ियों की जगह सिर्फ़ गाय के गोबर के उपले इस्तेमाल करना है। इसे तोड़कर हवन कुंड में रखकर कपूर से जलाएं। इसमें घी और हवन सामग्री जरूर डालें। इसके बाद लौंग और चीनी डालकर हवन करें। धुएं होने से घर शुद्ध हो जाएगा और नकारात्मक ऊर्जा भी दूर हो जाएगी।
बता दें, वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब गाय के गोबर के कंडे जलाए जाते हैं तो उससे निकलने वाला धुआं घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। इससे घर में शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसलिए हवन में हमेशा गाय के गोबर से बने उपले का इस्तेमाल करना चाहिए।