बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले फेज का नामांकन भले खत्म हो गया हो, लेकिन महागठबंधन में अब तक सीट शेयरिंग की तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। हालत ये है कि कांग्रेस को छोड़कर किसी भी पार्टी ने अब तक उम्मीदवारों की लिस्ट तक जारी नहीं की है। ऐसे में पहले चरण की कई सीटों पर उलझन और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
बिहार में पहले फेज का नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई है, लेकिन महागठबंधन में सीट शेयरिंग का सस्पेंस अभी भी बरकरार है। कांग्रेस को छोड़कर किसी भी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं की। पिछले आठ-दस दिनों से पटना से लेकर दिल्ली तक सीट शेयरिंग और उम्मीदवार चयन को लेकर कवायद चल रही थी, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी बिहार के नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाए। वहीं, बिना लिस्ट जारी किए पार्टियों ने अपने सिंबल बांटे और नामांकन दाखिल कर दिया। फर्स्ट फेज के अंतिम दिन तक RJD, कांग्रेस और VIP अपने-अपने सिंबल बांटते रहे। इतनी स्थिति उलझी हुई थी कि छह सीटों पर महागठबंधन की पार्टियां आमने-सामने आ गईं। हालांकि, इन छह सीटों में पांच पर कांग्रेस और RJD दोनों ने उम्मीदवार उतारे, जबकि एक सीट पर CPIML और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
VIP प्रमुख मुकेश सहनी इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में खुद उम्मीदवार नहीं बनेंगे। साथ ही उन्होंने कांग्रेस द्वारा उनके लिए पेश किए गए राज्यसभा के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया। सहनी ने साफ कहा, “हमें राज्यसभा नहीं चाहिए, मेरा लक्ष्य डिप्टी सीएम बनना है।” दरभंगा के गौराबौराम सीट से आज नामांकन कराने वाले थे, लेकिन अब उन्होंने अपने भाई संतोष सहनी को उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस बार केवल अपने प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। आगे कहा, “मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ूंगा, लेकिन महागठबंधन की सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत से काम करूंगा। इस बार बिहार में महागठबंधन की सरकार बनेगी।”