NEET मामले पर राजद विधायक भाई वीरेंद्र का बड़ा दावा: ‘मुंह खोलने पर आते हैं पुलिस अफसरों के फोन, बड़े नेताओं के बेटों को बचा रही सरकार’

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के तीसरे दिन विधानसभा परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब राजद (RJD) के कद्दावर विधायक भाई वीरेंद्र ने नीट (NEET) छात्रा हत्याकांड मामले को लेकर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए। भाई वीरेंद्र ने सीधे तौर पर प्रशासन और सत्ताधारी एनडीए (NDA) सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इस पूरे मामले में ‘लीपापोती’ की जा रही है और रसूखदार लोगों को बचाने के लिए सबूतों के साथ खिलवाड़ हुआ है।

बयान देने पर पुलिस देती है हिदायत
मीडिया से मुखातिब होते हुए भाई वीरेंद्र ने खुलासा किया कि जब भी वे इस संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ बोलते हैं, तो उन्हें पुलिस अधिकारियों के फोन आने लगते हैं। उन्होंने कहा, “जब हम इस मामले पर बयान देते हैं, तो बड़े पुलिस अफसरों का फोन आता है। वे कहते हैं कि सर, आप ऐसा बयान क्यों दे रहे हैं? ऐसा मामला नहीं है, कृपया ऐसे बयान मत दीजिए।” विधायक ने इसे मामले को दबाने की कोशिश करार दिया।

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SIT की प्रेस कॉन्फ्रेंस और सरकार की भूमिका
हाल ही में 4 फरवरी को पटना पुलिस की SIT (Special Investigation Team) द्वारा बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए विधायक ने कहा कि प्रशासन सवालों से भाग रहा है। गौरतलब है कि उस प्रेस वार्ता में जब मीडिया ने तीखे सवाल पूछे, तो SIT के अधिकारी बिना जवाब दिए ही उठकर चले गए थे। इस पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि सरकार पूरी तरह से साक्ष्यों को मिटाने में लगी है। “इस मामले में एनडीए के कुछ कद्दावर लोग शामिल हैं। बड़े नेताओं के बेटों का नाम इसमें आ रहा है, यही कारण है कि सरकार और प्रशासन मिलकर साक्ष्यों को नष्ट कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने न आ सके।”

सत्ता पक्ष पर सीधा हमला
जब उनसे स्पष्ट रूप से पूछा गया कि क्या सत्ता पक्ष के लोग इसमें शामिल हैं, तो उन्होंने बिना झिझक कहा, “एकदम शामिल हैं! सत्ता के संरक्षण के बिना इतनी बड़ी घटना पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। बड़े-बड़े सफेदपोशों के परिजनों को बचाने के लिए ही पुलिस और सरकार एक सुर में बोल रहे हैं।”

विधानसभा सत्र के दौरान भाई वीरेंद्र के इन आरोपों ने सियासी गलियारे में हलचल तेज कर दी है। विपक्ष अब इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है, जबकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

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