छठ पूजा का उत्सव अब सिर्फ बिहार तक नहीं, इन जगहों पर भी मनाएं जाता है,देखें लिस्ट!…

Ritu Raj

आज, 25 अक्टूबर से छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है। और यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, आत्मसंयम और भारतीय संस्कृति का प्रतीक बन चुका है। चार दिन तक चलने वाला यह पवित्र पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए समर्पित होता है, जिसमें व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए उगते और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। बिहार से शुरू हुई इस परंपरा ने न केवल बिहार, बल्कि पूरे भारत में अपनी गहरी जड़ें जमा ली हैं। आज हम आपको उन प्रमुख जगहों के बारे में बताएंगे, जहां छठ पूजा उतनी ही श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाई जाती है, जितनी कि बिहार में होती है।

छठ पूजा का त्योहार पूरे भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन कुछ राज्य ऐसे हैं जहां यह परंपरा और भी भव्यता से मनाई जाती है। बिहार से सटे उत्तर प्रदेश में वाराणसी और प्रयागराज के घाटों पर हर साल लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं। वाराणसी के घाटों पर सूर्य को अर्घ्य देना एक अद्भुत दृश्य होता है, जबकि प्रयागराज के संगम तट पर श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर पूजा करते हैं। वहीं, राजधानी दिल्ली में भी यह पर्व अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यमुना घाट पर हजारों श्रद्धालु सूर्योदय से पहले पहुंचकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं, और दिल्ली सरकार यहां छठ पूजा के लिए विशेष व्यवस्था करती है। साथ ही झारखंड के जमशेदपुर में सुवर्णरेखा नदी के किनारे छठ पूजा की सादगी और आस्था की अद्भुत मिसाल पेश की जाती है। यहां स्थानीय लोग बिना किसी दिखावे के दीप जलाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं, और घाट पर भक्ति गीतों और दीपों की रौशनी से एक आध्यात्मिक माहौल बनता है।

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दरअसल, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी छठ पूजा अब एक महत्वपूर्ण परंपरा बन चुकी है। यहां के रविंद्र सरोवर झील पर हर साल बिहार और पूर्वांचल के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं। इस झील के किनारे जलते सैकड़ों दीप और श्रद्धालुओं द्वारा सूर्य देव की पूजा का दृश्य एक अलौकिक अनुभव देता है। कोलकाता में इस पर्व का उत्सव लोकगीतों और दीपों की रोशनी से सजीव हो उठता है। छठ पूजा की परंपरा सिर्फ बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब यह छत्तीसगढ़ में भी बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। बिलासपुर सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में पूर्वांचल के लोग तो सक्रिय रूप से भाग लेते ही हैं, अब स्थानीय लोग भी इस महापर्व का हिस्सा बन चुके हैं।

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