मुजफ्फरपुर का चुनावी रण NDA के लिए ‘अग्निपरीक्षा’: पीएम मोदी 30 अक्टूबर को फूकेंगे बिगुल

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
उत्तर बिहार की राजनीति का केंद्र मुजफ्फरपुर जिला, इस बार सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) के लिए आसान चुनावी रण नहीं रहा है। विपक्षी महागठबंधन (INDIA Alliance) की बढ़ी हुई ताकत और बदले हुए राजनीतिक समीकरणों ने एनडीए की चुनौतियों को कई गुना बढ़ा दिया है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी दौरे की शुरुआत 30 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर से करने जा रहे हैं। एनडीए के रणनीतिकार पीएम मोदी के इस दौरे को उनकी चुनावी नैया पार लगाने वाले ‘उद्धारक’ के रूप में देख रहे हैं।

मुजफ्फरपुर में एनडीए की स्थिति ठीक नहीं
मुजफ्फरपुर जिले की 11 विधानसभा सीटों में से कई पर एनडीए की स्थिति मजबूत नहीं मानी जा रही है। 2020 के चुनाव में, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने गायघाट, मीनापुर, कुढ़नी और मुजफ्फरपुर जैसी सीटें एनडीए से छीन ली थीं।

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सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP), जिसका मुजफ्फरपुर क्षेत्र में अच्छा खासा प्रभाव है, अब महागठबंधन में शामिल हो गई है। 2020 में वीआईपी ने जिन साहिबगंज और बोचहा सीटों पर जीत दर्ज की थी, उनके समर्थकों का बड़ा हिस्सा अब महागठबंधन के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। हालांकि, वीआईपी के जीते हुए विधायक अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं, लेकिन पार्टी की मूल ताकत और राजनीतिक केंद्र मुजफ्फरपुर होने से महागठबंधन को बड़ा लाभ मिल रहा है। बोचहा सीट तो 2022 के उपचुनाव में पहले ही राजद (अमन पासवान) के खाते में जा चुकी है।

हारी हुई सीटों पर कड़ी जंग
एनडीए अपनी हारी हुई सीटों को वापस जीतने के लिए रणनीति बदल चुका है, लेकिन महागठबंधन अपनी पकड़ छोड़ने को तैयार नहीं है।

गायघाट: 2020 में राजद के निरंजन राय से हारने के बाद, एनडीए ने इस बार जातीय समीकरण बदलते हुए यादव के बदले राजपूत जाति की कोमल सिंह (जदयू) को उतारा है, जो सांसद वीणा देवी की बेटी हैं। उनका मुकाबला राजद के सीटिंग विधायक निरंजन राय से है।

मीनापुर: यहाँ राजद के राजीव कुमार ने जदयू के मनोज कुमार को हराया था। इस बार भाजपा ने अजय कुमार को उम्मीदवार बनाकर राजद के राजीव कुमार को कड़ी टक्कर देने की तैयारी की है।

कुढ़नी: 2020 में यह सीट राजद के खाते में गई थी, लेकिन उपचुनाव में भाजपा के केदार गुप्ता ने जीत दर्ज कर ली थी। इस बार भाजपा केदार गुप्ता को लेकर आश्वस्त है, जबकि राजद ने सुनील सुमन को मैदान में उतारा है।

कांटी: यह सीट राजद के मो. इसराइल मंसूरी ने जीती थी। इस बार मंसूरी का मुकाबला जदयू से खम ठोक रहे निर्दलीय से जदयू में आए अजित सिंह से है।

साहिबगंज: 2020 में वीआईपी के राजू सिंह ने यह सीट जीती थी। अब वीआईपी के राजू सिंह भाजपा के टिकट पर चुनावी जंग में हैं, जबकि राजद ने उम्मीदवार बदलकर पृथ्वीनाथ राय को मैदान में उतारा है।

पीएम मोदी के ‘पत्ते’ का इंतजार
एनडीए के रणनीतिकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 30 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर की धरती से होने वाले ‘शंखनाद’ का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मुजफ्फरपुर की 11 सीटों पर जीत हासिल करने के लिए पीएम मोदी जनसभा में कौन सा ‘पत्ता’ फेंकते हैं, इस पर न सिर्फ एनडीए, बल्कि विपक्ष की भी कड़ी निगाहें हैं। विपक्ष जीती हुई सीटों को बचाने और हारी हुई सीटों पर भी जीत की तमन्ना के साथ चुनावी समर में डटा हुआ है। पीएम मोदी का यह दौरा मुजफ्फरपुर के चुनावी भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।

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