IRCTC घोटाला: लालू परिवार पर कोर्ट में ट्रायल शुरू, ‘चुनाव प्रचार के कारण’ सुनवाई टालने की अर्जी

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
चर्चित आईआरसीटीसी (IRCTC) घोटाला मामले में आज से दिल्ली की राउज़ ऐवन्यू कोर्ट में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राजद नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के तहत रोज़ाना ट्रायल शुरू हो गया है। हालांकि, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की गहमागहमी के बीच लालू परिवार ने कोर्ट से इस रोजाना सुनवाई पर आपत्ति जताते हुए चार हफ्तों की मोहलत मांगी है।

लालू परिवार के लिए पेश हुए वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने अदालत में दलील दी कि पूरा परिवार फिलहाल बिहार चुनाव प्रचार में व्यस्त है। चुनाव के माहौल में रोजाना अदालत में उपस्थित रहना या इतने बड़े कानूनी केस की तैयारी करना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा, “चुनाव प्रचार और रोजाना ट्रायल की प्रक्रिया साथ नहीं चल सकती।”

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18,000 पन्नों की चार्जशीट और कानूनी दबाव
वकील मनिंदर सिंह ने अदालत को बताया कि सीबीआई (CBI) ने इस मामले में करीब 18 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जबकि अदालत का आदेश भी 250 पन्नों का है। इतने विशाल दस्तावेजों का अध्ययन करने और बचाव की तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय जरूरी है, खासकर तब जब लालू यादव और उनके परिवार पर पहले से ही चार अलग-अलग आपराधिक मामलों में रोजाना सुनवाई का आदेश जारी है। उन्होंने न्याय की प्रक्रिया में जल्दबाजी से बचाव पक्ष को नुकसान होने की आशंका जताई।

सीबीआई ने किया कड़ा विरोध
लालू परिवार की इस मांग का केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कड़ा विरोध किया। सीबीआई की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों में तेजी से ट्रायल चलाने का निर्देश दे चुका है। ऐसे में चुनाव के नाम पर सुनवाई में देरी करना न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ होगा। एजेंसी ने कहा कि इस केस में पहले भी कई बार समय लिया जा चुका है, अब और विलंब उचित नहीं है। अदालत ने सीबीआई से लालू परिवार की अर्जी पर जल्द जवाब दाखिल करने को कहा है।

क्या है IRCTC घोटाला मामला?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। सीबीआई के आरोपपत्र के अनुसार, लालू प्रसाद यादव पर अपने कार्यकाल के दौरान रांची और पुरी के रेलवे के दो बीएनआर होटलों को निजी कंपनी सुजाता होटल्स को गलत तरीके से लीज पर देने का आरोप है। आरोप है कि इस ‘उपकार’ के बदले में लालू परिवार को पटना में एक मूल्यवान भूखंड पहले उनके करीबी सहयोगी के नाम किया गया, और बाद में इस कंपनी और संपत्ति को लालू यादव के परिवार के सदस्यों ने मामूली कीमत पर अपने नियंत्रण में ले लिया।

राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
लालू परिवार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। राजद का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इस केस को इतनी तेजी से चलाने का एकमात्र उद्देश्य राजनीतिक दबाव बनाना और बिहार में महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव के चुनाव प्रचार में बाधा डालना है। पार्टी नेताओं ने तर्क दिया है कि ‘तेजी से ट्रायल’ का मतलब ‘चुनावी हस्तक्षेप’ नहीं होना चाहिए।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में 13 अक्टूबर को लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप तय किए थे। अब सभी की निगाहें राउज एवेन्यू कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत सीबीआई के जवाब के बाद फैसला करेगी कि रोजाना ट्रायल जारी रहेगा या लालू परिवार को कुछ दिनों की राहत मिलेगी।

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