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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान समाप्त होने के साथ ही अब सबकी निगाहें 14 नवंबर को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं। इस बीच, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी का सिलसिला तेज हो गया है। इसी क्रम में, जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) द्वारा लगाए गए आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है।
संजय झा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए महाभारत का उदाहरण दिया और दावा किया कि एनडीए (NDA) के पांचों दल ‘पांच पांडवों’ की तरह पूरी तरह एकजुट हैं और विकसित बिहार के निर्माण के लिए संकल्पित हैं।
राजद के पोस्ट पर संजय झा का पलटवार
दरअसल, राजद ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (X) हैंडल पर एक पोस्ट किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि NDA के घटक दल आपस में ही तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। राजद ने लिखा था, “BJP-LJP वाले JDU को वोट नहीं डलवा रहे और JDU वाले BJP-LJP को वोट नहीं डलवा रहे। इस बात से BJP, LJP या JDU के किसी भी नेता ने पूरे चुनाव में कभी भी इंकार किया?”
इस आरोप के जवाब में संजय कुमार झा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा “महाठगबंधन ने पहले ढपोरशंखी घोषणाओं के जरिए जनता को बरगलाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन जब दाल नहीं गली, तो हताश होकर NDA के बारे में झूठ फैलाना शुरू कर दिया है।”
उन्होंने आगे स्पष्ट और विश्वास से भरा दावा करते हुए कहा, “बिहार की जागरूक जनता सब देख रही है। 14 नवंबर को फिर साबित होगा- झूठे का मुंह काला, सच्चे का बोलबाला।” इस बयान के माध्यम से उन्होंने न केवल राजद के आरोपों को खारिज किया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि जीत NDA की ही होगी।
कांटे की टक्कर और त्रिकोणीय मुकाबले का दावा
बिहार चुनाव में इस बार मुख्य मुकाबला सत्ताधारी एनडीए (जिसमें JDU, BJP, LJP और अन्य शामिल हैं) और विपक्षी महागठबंधन (जिसमें RJD, कांग्रेस और वाम दल शामिल हैं) के बीच है। हालांकि, इस बार जन सुराज पार्टी के मैदान में उतरने से कई सीटों पर मुकाबले के त्रिकोणीय होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव भी अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में कुछ सीटों पर ताल ठोक रहे हैं।
फिलहाल मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, और अब सभी दावे और कयास केवल तीन दिनों तक ही चलेंगे। 14 नवंबर को जब मतगणना होगी, तब यह स्पष्ट हो जाएगा कि सच्चे का बोलबाला होता है या झूठे का मुंह काला। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार का जनादेश कई मायनों में अप्रत्याशित हो सकता है।