बिहार की छात्राओं को मिलेगा बड़ा अवसर, आईआईटी-जेईई जैसी परीक्षाओं के लिए सरकार देगी मुफ्त कोचिंग…

Ritu Raj

बिहार में छात्राओं के सपनों को साकार करने की दिशा में सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। पढ़ाई में आर्थिक बाधाओं को खत्म करने के उद्देश्य से पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने आईआईटी कानपुर के साथ ‘साथी’ कार्यक्रम के कार्यान्वयन को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत विभाग के अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय +2 उच्च विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं को आईआईटी, जेईई जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विश्वस्तरीय कोचिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

दरअसल, बैठक के दौरान राज्य के 39 अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय विद्यालयों की कार्यप्रणाली की विस्तार से समीक्षा की गई। मंत्री रमा निषाद ने स्पष्ट निर्देश दिए कि छात्राओं को स्वच्छ वस्त्र, पौष्टिक भोजन और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने ‘जीविका’ के माध्यम से मेस संचालन और साफ-सफाई व्यवस्था पर सख्त निगरानी रखने को कहा। इसके साथ ही शिक्षकों की गुणवत्ता, छात्राओं के नामांकन की स्थिति, निर्माणाधीन योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन तथा लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों के त्वरित निपटारे पर भी विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा जननायक कर्पूरी ठाकुर कल्याण छात्रावासों और अन्य पिछड़ा वर्ग छात्रावासों के जीर्णोद्धार, बेहतर मेस व्यवस्था और पेयजल प्रबंधन को भी प्राथमिकता सूची में रखा गया। अपने संबोधन में मंत्री रमा निषाद ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देना आवश्यक है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ बिना बाधा के पहुँच सके। बैठक में विभाग के प्रधान सचिव, अपर सचिव, संयुक्त सचिव सहित राज्यभर से आए प्रमंडलीय उप निदेशक, जिला पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण पदाधिकारी, प्रधानाध्यापक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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हालांकि, इस बैठक और आईआईटी कानपुर के साथ हुए एमओयू से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि बिहार सरकार शिक्षा और कल्याण के क्षेत्र में नवाचार तथा गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण की दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि समाज के हर वर्ग, विशेषकर पिछड़े और अति पिछड़े तबके की छात्राओं को समान अवसर मिलें और वे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर आत्मनिर्भर बन सकें।

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