आतंकी मॉड्यूल केस में आया अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम, अब प्रशासन ने तोड़ी चुप्पी!…

Ritu Raj

हरियाणा के फरीदाबाद में आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी सवालों के घेरे में आ गई है। डॉक्टर मुजम्मिल की गिरफ्तारी और दिल्ली ब्लास्ट के संदिग्ध उमर उन नबी के इस यूनिवर्सिटी से जुड़े होने के खुलासे ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। इस बीच बढ़ते विवाद पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रेस रिलीज जारी कर सफाई दी है। संस्थान का कहना है कि जिन डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं, उनका यूनिवर्सिटी से कोई निजी या स्थायी संबंध नहीं रहा, वे केवल अपने आधिकारिक कार्यों तक सीमित थे। प्रशासन ने यह भी दावा किया है कि कैंपस में किसी प्रकार का खतरनाक रसायन या विस्फोटक सामग्री नहीं रखी जाती।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि उसके लैब्स का इस्तेमाल केवल एमबीबीएस छात्रों की ट्रेनिंग और शिक्षा के लिए किया जाता है तथा सभी गतिविधियां निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत होती हैं। कुलपति डॉ. भूपिंदर कौर आनंद ने बयान में कहा कि यूनिवर्सिटी इस पूरे घटनाक्रम से आहत है और इसकी निंदा करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों द्वारा हिरासत में लिए गए दोनों डॉक्टरों का संस्थान से कोई निजी संबंध नहीं है। कुलपति ने कहा कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक जिम्मेदार शैक्षणिक संस्थान के रूप में देश की एकता, शांति और सुरक्षा के साथ खड़ी है तथा जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग दे रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

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गौरतलब है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी को यूजीसी से वर्ष 2015 में मान्यता मिली थी। यह यूनिवर्सिटी मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, एजुकेशन और साइंस जैसे विभिन्न क्षेत्रों में डिप्लोमा से लेकर डॉक्टरेट स्तर तक की पढ़ाई कराती है। इसके साथ ही अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक हॉस्पिटल भी संचालित होता है, जहां मेडिकल छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है। यूनिवर्सिटी में न केवल भारत बल्कि कई विदेशी छात्र भी शिक्षा प्राप्त करते हैं।

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