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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि राज्य की राजनीति में प्रमुख गठबंधनों का दबदबा कायम है। मधुबनी जिले की 10 विधानसभा सीटों पर कुल 100 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, लेकिन इनमें से 80% प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। यह नतीजे इस बात को दर्शाते हैं कि एनडीए और महागठबंधन के बीच कोई तीसरी ताकत असरदार भूमिका नहीं निभा पाई, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का प्रदर्शन भी बेहद खराब रहा।
प्रत्याशियों की जमानत जब्त
मधुबनी जिले की 10 सीटों पर कुल 100 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे, जिसमें से 80 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। जमानत बचाने के लिए एक प्रत्याशी को कुल पड़े वोट का कम से कम छठा हिस्सा प्राप्त करना होता है, लेकिन एनडीए और महागठबंधन के अलावा कोई भी प्रत्याशी यह आंकड़ा पार नहीं कर सका।
इसमें सबसे दिलचस्प परिणाम हरलाखी विधानसभा का रहा, जहां मोहम्मद शब्बीर, जो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े थे, उन्होंने 22,041 वोट हासिल किए, लेकिन वह भी अपनी जमानत नहीं बचा पाए। वहीं, प्रमुख गठबंधनों के अलावा चार प्रत्याशियों को 10,000 से अधिक वोट मिले, जबकि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में नोटा समेत नौ प्रत्याशियों को 5,000 से 10,000 के बीच वोट मिले।
किस विधानसभा में कितने प्रत्याशी की जमानत जब्त हुई
मधुबनी जिले की विभिन्न विधानसभा सीटों पर जमानत जब्त होने वाले प्रत्याशियों की संख्या इस प्रकार रही:
हरलाखी: 10 में से 8 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
बेनीपट्टी: 11 में से 9 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
खजौली: 8 में से 6 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
बाबूबरही: 11 में से 9 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
बिस्फी: 8 में से 6 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
मधुबनी: 9 में से 7 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
राजनगर: 7 में से 5 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
झंझारपुर: 13 में से 11 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
फुलपरास: 10 में से 8 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
लौकहा: 13 में से 11 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
वीवीपैट से गिनती
मतगणना के दौरान कुछ विधानसभा क्षेत्रों में सीयू (कंट्रोल यूनिट) या डिस्प्ले में खराबी आने के कारण वीवीपैट की पर्चियों से वोटों की गिनती की गई। लौकहा विधानसभा में सबसे ज्यादा 1,662 वोटों की गिनती वीवीपैट की पर्चियों से की गई। बाबूबरही और झंझारपुर को छोड़कर सभी विधानसभा क्षेत्रों में वीवीपैट से वोटों की गिनती की गई, जहां 283 से लेकर 1,662 वोटों तक की गिनती हुई।
मधुबनी में इस चुनावी परिणाम ने यह साफ कर दिया कि बिहार की राजनीति में केवल बड़े गठबंधन ही कामयाब हो रहे हैं, जबकि छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवारों का चुनावी भविष्य अब भी धुंधला नजर आ रहा है। वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को लेकर पहले किए गए कयास अब पूरी तरह से गलत साबित हुए हैं। पार्टी का कोई भी प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाया, जो आगामी चुनावों में इस पार्टी की राजनीतिक स्थिरता पर सवालिया निशान खड़ा करता है।