नेशनल हेराल्ड केस: राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज, दिल्ली पुलिस की FIR में 6 लोग नामजद

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
नेशनल हेराल्ड धनशोधन (Money Laundering) मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एक नई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की है, जिसमें दोनों गांधी को आपराधिक षड्यंत्र के तहत नामजद किया गया है। यह FIR दिल्ली की एक अदालत द्वारा नेशनल हेराल्ड मामले में अपना फैसला 16 दिसंबर तक टालने के ठीक एक दिन बाद दर्ज की गई है।  

ताज़ा FIR, जिसकी तारीख 3 अक्टूबर है, कुल छह लोगों और तीन कंपनियों के खिलाफ दर्ज की गई है। यह FIR प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर आधारित है, जिसने अपनी जांच रिपोर्ट दिल्ली पुलिस के साथ साझा की थी।  

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FIR में नामजद आरोपी
इस एफआईआर में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के अलावा निम्नलिखित लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है:

नामजद व्यक्ति: सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी और एक अज्ञात व्यक्ति।

नामजद कंपनियाँ: एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL), यंग इंडियन और डॉटैक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड।

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इन सभी ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र की मूल कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) का धोखाधड़ी से अधिग्रहण किया।

2,000 करोड़ की संपत्ति और लेनदेन का आरोप
पूरा मामला यंग इंडियन नामक एक गैर-लाभकारी कंपनी के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी है। आरोप है कि इस लेनदेन में कोलकाता स्थित कथित शेल कंपनी डॉटैक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड ने यंग इंडियन को 1 करोड़ रुपये दिए।

आरोप के अनुसार, इस 1 करोड़ रुपये के लेनदेन के माध्यम से यंग इंडियन ने कांग्रेस पार्टी को 50 लाख रुपये का भुगतान किया और इसके बदले में उसने AJL पर नियंत्रण हासिल कर लिया। बताया जाता है कि AJL के पास लगभग 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। एफआईआर में इसी अधिग्रहण को धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का परिणाम बताया गया है।

कांग्रेस पार्टी ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया है और इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने से यह मामला अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुँच गया है, जिससे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है। अदालत का फैसला 16 दिसंबर को आने की उम्मीद है, जिसके बाद इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।

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