विधानसभा सत्र छोड़ तेजस्वी का विदेश सफर – क्या पार्टी रणनीति का हिस्सा है ‘यूरोप प्लान’?…

Ritu Raj

बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तेजस्वी यादव का अचानक पब्लिक लाइफ से ओझल होना और फिर परिवार संग यूरोप रवाना होना राजनीतिक गलियारों में नए सवाल खड़े कर रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान बेहद सक्रिय दिखे RJD नेता नतीजों के बाद न सिर्फ शांत पड़े, बल्कि विपक्ष के नेता चुने जाने के बावजूद शीतकालीन सत्र के शुरुआती दो दिनों के बाद सदन से दूरी बनाकर निजी विदेश यात्रा पर निकल गए। उनके इस फैसले ने पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर विपक्ष तक में चर्चा का माहौल गर्म कर दिया है।

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव पूरे आत्मविश्वास और आक्रामक अभियान के साथ मैदान में उतरे थे। उन्होंने न सिर्फ अपनी जीत का दावा किया, बल्कि 14 नवंबर को परिणाम और 18 नवंबर को शपथ तक की तारीखें तय कर दी थीं। लेकिन जनादेश ने बिल्कुल उलटी तस्वीर पेश की। NDA 202 सीटों के साथ सत्ता में लौटा, जबकि राजद 25 सीटों तक सिमट गई और पूरा महागठबंधन 35 का आंकड़ा भी नहीं छू सका। हालांकि, ऐसे में हार के तुरंत बाद तेजस्वी का अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब होना राजनीतिक चर्चाओं का सबसे बड़ा विषय बन गया। 14 से 23 नवंबर तक वे मीडिया, सड़क और संगठन हर मंच से दूर रहे। उनकी गैरमौजूदगी तब और अधिक चौंकाने वाली दिखी जब वे 20 नवंबर को गांधी मैदान में हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह में भी नजर नहीं आए, जबकि कार्यक्रम में प्रधानमंत्री से लेकर 11 राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। दरअसल, सदन की कार्यवाही से लेकर राजनीतिक संवाद तक उनकी चुप्पी पर भाजपा विधायक नीरज कुमार ने खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने सिर्फ सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार सरकार को एक औपचारिक बधाई संदेश देकर अपनी प्रतिक्रिया सीमित रखी, जिसने उनकी ‘लंबी चुप्पी’ को और ज्यादा रहस्यमयी बना दिया।

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बिहार की राजनीति में विपक्ष की सक्रिय भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। और तेजस्वी की अनुपस्थिति ने सत्तारूढ़ NDA को बिना चुनौती अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का अवसर दे दिया। वहीं, पार्टी को अपनी आंतरिक चुनौतियों जैसे पारिवारिक तनाव, संगठनात्मक असंतोष और हालिया हार की समीक्षा का सामना करना पड़ा। उनकी यह यूरोप यात्रा ने उनके चारों ओर उठ रहे सवालों को और हवा दे दी है। हालांकि, उनके समर्थक इसे एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि वे नई ऊर्जा, स्पष्ट रणनीति और मजबूत संकल्प के साथ लौटेंगे। अब राजनीतिक दृष्टि से सभी की निगाहें उनके अगले कदम यह तय करेगा कि यह चुनावी हार उनके संकल्प को और मजबूत करेगी या उनके लिए गंभीर चेतावनी बनकर सामने आएगी।

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