सिटी पोस्ट लाइव :मोदी और नीतीश सरकार के मंत्री सरकार से वेतन भी ले रहे हैं और पेंशन भी.RTI के जरिए सामने आई जानकारी के अनुसार बिहार के कई ऐसे नेताओं के नाम हैं जो संसद के सदस्य हैं और अब पूर्व सदस्य के तौर पर बिहार सरकार से पेंशन ले रहे हैं.सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम बिहार सरकार के मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और मोदी सरकार में मंत्री सतीश चंद्र दुबे का है.
उपेंद्र कुशवाहा विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य के नाते 2005 से पेंशन ले रहे हैं.. इस समय यह राशि 47 हजार रुपए है. कुशवाहा इसके साथ ही राज्यसभा सांसद का वेतन भी ले रहे हैं.पश्चिम चंपारण से आने वाले सतीश चंद्र दुबे राज्यसभा के सदस्य हैं. अभी भारत सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं. सतीश चंद्र को 2019 से पेंशन मिल रही है. इस समय यह राशि 59,000 रुपए है.जदयू के सीनियर नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव अभी बिहार सरकार में वित्त मंत्री हैं. ऊर्जा विभाग भी इनके जिम्मे है. उन्हें 2005 से 10 हजार रुपए पेंशन मिल रही है.सुपौल से विधायक बिजेंद्र यादव 1990 से लगातार विधानसभा चुनाव जीत रहे हैं. 2025 में पांचवीं बार उन्होंने शपथ ली. लंबे समय से ऊर्जा विभाग के मंत्री हैं. ईमानदार नेता की छवि है.
जदयू नेता देवेश चंद्र ठाकुर लोकसभा सांसद हैं. 2020 से 86,000 रुपए पेंशन ले रहे हैं. विधान परिषद में सभापति जैसे बड़े संवैधानिक पद पर रहे हैं. तिरहुत स्नातक सीट से लंबे समय तक एमएलसी रहे.देवेश लोकसभा चुनाव 2024 जीतकर सांसद बने हैं. मधेपुरा के ललन सर्राफ बिहार विधान परिषद का सदस्य होने के नाते वेतन ले रहे हैं. इसके साथ ही 2020 से 50 हजार रुपए पेंशन भी पा रहे हैं. जदयू नेता ललन की गिनती मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में होती है. 2024 में इन्हें विधान परिषद में जदयू का उपनेता नियुक्त किया गया था.
2025 के चुनाव में झंझारपुर सीट से जीतकर विधायक बने नीतीश मिश्रा 2015 से पेंशन ले रहे हैं. अभी 43 हजार रुपए मिल रहे हैं. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र नीतीश मिश्रा की गिनती पढ़े-लिखे नेताओं में होती है. बिहार सरकार के कई विभागों में मंत्री रहे हैं. इस बार मंत्री पद नहीं मिला है.जदयू नेता संजय सिंह विधान पार्षद हैं. उन्हें 2018 से पेंशन मिल रही है. वर्तमान में 68 हजार रुपए पेंशन ले रहे हैं.वेतन और पेंशन एक साथ पाने वालों की लिस्ट में भोला यादव का भी नाम है. हालांकि उन्हें वर्तमान में मिल रही पेंशन नियम के खिलाफ नहीं है. वह चुनाव हार गए हैं. भोला को पेंशन के रूप में 65 हजार रुपए मिल रहे हैं.
माननीय हों या सामान्य नौकरी वाले लोग सभी को हर साल जिंदा होने का सर्टिफिकेट देना पड़ता है. इससे साफ है कि हर वर्ष माननीय बता रहे हैं कि वे जीवित और पेंशन के हकदार हैं.नियम के तहत वेतन के साथ-साथ पेंशन नहीं लिया जा सकता है. किसी भी सदन का वेतन मिलने पर पहले से प्राप्त हो रहा पेंशन बंद होना चाहिए. पेंशन पाने के लिए लिख कर देना होता है कि राज्य या केंद्र सरकार में कहीं सेवा नहीं दे रहे हैं.रिटायर होने के बाद ही माननीय पेंशन ले सकते हैं. अगर पद पर रहते हुए पेंशन लेते हैं तो गलत और नियम के खिलाफ है.बिहार के RTI कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय के आवेदन पर दी गई सूचना से ये गड़बड़झाला उजागर हुआ है.