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वैश्विक व्यापार युद्ध और चीन की विस्तारवादी आर्थिक नीतियों के बीच भारत ने अपने घरेलू उद्योगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार ने चीन, वियतनाम और नेपाल से आने वाले कुछ चुनिंदा स्टील उत्पादों पर नया आयात शुल्क (Import Tax) लगाने की घोषणा की है। यह फैसला मुख्य रूप से चीन से होने वाले सस्ते स्टील के आयात को नियंत्रित करने और स्थानीय उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है।
3 साल के लिए लागू होगा नया टैक्स स्लैब
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह नया टैरिफ अगले तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इसकी दरें समय के साथ धीरे-धीरे कम होंगी, जो इस प्रकार हैं:
• प्रथम वर्ष (2025-26): 12% आयात शुल्क
• द्वितीय वर्ष: 11.5% आयात शुल्क
• तृतीय वर्ष: 11% आयात शुल्क
क्यों पड़ी इस कड़े कदम की जरूरत?
भारत वर्तमान में कच्चे स्टील का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। हालांकि, पिछले कुछ समय से चीन से बहुत ही कम कीमतों पर भारी मात्रा में स्टील भारत में डंप किया जा रहा था। इस ‘सस्ते और घटिया क्वालिटी’ के स्टील के कारण भारतीय कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा था और बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया था। व्यापार प्राधिकरण की जांच में पाया गया कि स्टील आयात में अचानक और तेज वृद्धि हुई है, जो स्थानीय उद्योगों को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचा सकती है।
कौन से देश और उत्पाद होंगे प्रभावित?
यह टैक्स मुख्य रूप से चीन, वियतनाम और नेपाल से आने वाले स्टील पर लागू होगा। हालांकि, विकासशील देशों की श्रेणी में आने वाले कुछ राष्ट्रों को इससे छूट दी गई है। साथ ही, स्टेनलेस स्टील जैसे कुछ विशेष स्टील उत्पादों को फिलहाल इस टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है।
ग्लोबल ट्रेड वॉर का असर
भारत का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में चीनी स्टील निर्यात को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्टील पर आयात शुल्क लगाए जाने के बाद, चीन ने अपना माल दूसरे देशों की ओर मोड़ दिया था। इसके जवाब में दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे देशों ने भी इस साल की शुरुआत में चीनी स्टील पर एंटी-डंपिंग टैक्स लगाया था। भारत के इस कदम से घरेलू स्टील दिग्गजों (जैसे टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू) को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।