बिहार सरकारी सेवक नियमावली-2005 के तहत सख्त निर्देश, गुमनाम शिकायतें होंगी खारिज…

Ritu Raj

अब बिहार सरकार के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ गुमनाम पत्र, बिना हस्ताक्षर वाले खुले पत्र या पर्चों के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में न केवल कार्रवाई, बल्कि प्रारंभिक जांच तक शुरू नहीं होगी।

वहीं, आम नागरिकों द्वारा नाम, हस्ताक्षर और सही पते के साथ भेजी गई शिकायतों पर भी सीधे कार्रवाई नहीं होगी। किसी भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले शिकायतकर्ता से शपथ-पत्र लिया जाएगा। हालांकि सांसदों और विधायकों को शपथ-पत्र की बाध्यता से छूट दी गई है, लेकिन उन्हें लिखित रूप में यह आश्वासन देना होगा कि वे आरोपों से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध कराएंगे। वहीं, ये प्रावधान बिहार सरकारी सेवक नियमावली–2005 के तहत तैयार किए गए एक मास्टर सर्कुलर में शामिल हैं, जिसे सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया है। यह सर्कुलर राज्य सरकार के अधीन कार्यरत लगभग 8 लाख कर्मचारियों पर लागू होगा। इसका उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ होने वाली विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता लाना है।

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मास्टर सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई स्वतः समाप्त मानी जाएगी। यह सर्कुलर अब हर वर्ष जारी किया जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी निजी मामले में आपराधिक केस में फंसता है, तो उसे इसकी तत्काल सूचना अपने विभाग को देना अनिवार्य होगा। किसी आपराधिक प्रकरण में जब सक्षम न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल हो जाए, तब भी इसकी जानकारी सरकार को देनी होगी। ऐसा न करने पर इसे कदाचार माना जाएगा और संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

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