पाक DG-ISPR की ‘सड़कछाप’ भाषा ने दुनिया को चौंकाया, क्या हार के डर और भीतरी दबाव में है रावलपिंडी?

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
अपनी पेशेवर गिरावट और कूटनीतिक विफलताओं के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाली पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी फजीहत कराई है। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक की हालिया प्रेस ब्रीफिंग ने सैन्य मर्यादाओं की सभी सीमाएं लांघ दी हैं। कूटनीतिक भाषा के बजाय ‘सड़कछाप’ जुमलेबाजी और फिल्मी डायलॉग का सहारा लेकर डीजी-आईएसपीआर ने न केवल पाकिस्तान की असुरक्षा को उजागर किया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि पड़ोसी देश अब संवाद के बजाय खुले उकसावे की राह पर है।

‘मजा ना आया तो पैसे वापस’—सैन्य प्रवक्ता या कोई नौटंकी?
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान डीजी-आईएसपीआर ने जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया, उसने रक्षा विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया। ‘मजा ना कराया तो पैसे वापस’ जैसी छिछली और व्यंग्यात्मक टिप्पणी किसी जिम्मेदार सैन्य अधिकारी की ओर से आना यह दर्शाता है कि पाकिस्तानी सेना गहरे आंतरिक दबाव और बौखलाहट में है। जानकारों का मानना है कि जब कोई संस्था तर्कों और रणनीति में पिछड़ने लगती है, तो वह इसी तरह की बचकानी बयानबाजी और तंज को ढाल बनाती है।

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‘हार्ड स्टेट’ बनने की घोषणा और असुरक्षा का भाव
ब्रीफिंग में डीजी-आईएसपीआर ने जोर देकर कहा कि 2026 में पाकिस्तान को एक ‘हार्ड स्टेट’ (कठोर राष्ट्र) बनना होगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान पाकिस्तान की अपनी कमजोरी की स्वीकारोक्ति है। एक राष्ट्र तब ‘हार्ड’ बनने की बात करता है जब उसकी आंतरिक स्थिरता और बाहरी साख दोनों संकट में हों। इसके अलावा, भारत और अफगानिस्तान को दी गई खुलेआम धमकियां पाकिस्तान के उस ‘विक्टिम कार्ड’ को भी दर्शाती हैं, जिसमें वह खुद को हर तरफ से दुश्मनों से घिरा हुआ बताता है।

रणनीति कम, फिल्मी डायलॉगबाजी ज्यादा
डीजी-आईएसपीआर ने नाटकीय लहजे में कहा कि दुश्मन चाहे “ऊपर से आए, नीचे से आए, दाएं से आए या बाएं से आए”, पाकिस्तान तैयार है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह बयान रणनीतिक से ज्यादा अपनी आवाम (जनता) को बहलाने के लिए दी गई एक ‘डायलॉगबाजी’ है। पाकिस्तान में बढ़ते आर्थिक संकट और सेना के प्रति जनता के आक्रोश को मोड़ने के लिए अक्सर भारत-विरोधी भावनाओं को भड़काया जाता है, और यह ब्रीफिंग उसी पुरानी पटकथा का एक नया अध्याय है।

भीतरी असंतोष दबाने की कोशिश
ब्रीफिंग में यह दावा करना कि ‘राजनीति, सेना और जनता’ सब एक हैं, पाकिस्तान की जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता। असल में, सेना के वर्चस्व के खिलाफ पाकिस्तान के भीतर ही उठ रही आवाजों को कुचलने और अपनी सत्ता को जायज ठहराने के लिए डीजी-आईएसपीआर ने यह दिखावा किया। पहली बार पाकिस्तान ने इतनी बेबाकी और छिछलेपन के साथ सार्वजनिक मंच पर अपनी शत्रुता को स्वीकार किया है, जो आने वाले समय में दक्षिण एशिया की शांति के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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