सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में चल रहे राजस्व महाअभियान के बीच हड़ताल कर रहे 110 से अधिक राजस्व कर्मियों को सरकार ने बर्खास्त कर दिया है। सरकार ने यह सख्त कदम उन कर्मियों के खिलाफ उठाया है, जो अपनी मांगों को लेकर लगातार काम ठप किए हुए थे, जिससे सरकारी कामकाज में बाधा आ रही थी। बर्खास्त किए गए कर्मियों में राजस्व कर्मचारी संघ के अध्यक्ष और सचिव भी शामिल हैं।
देर रात जारी हुआ आदेश
यह कार्रवाई देर रात सरकार द्वारा एक आदेश जारी कर की गई। राजस्व विभाग ने साफ कर दिया है कि राजस्व महाअभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान हड़ताल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार के इस कदम को एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि काम में किसी भी तरह की लापरवाही या बाधा को गंभीरता से लिया जाएगा। बर्खास्त किए गए कर्मियों को सीधे तौर पर इस आदेश की सूचना भेज दी गई है।
सरकार की चेतावनी: हड़ताल से वापस लौटो या बर्खास्तगी के लिए तैयार रहो
सरकार ने बर्खास्तगी के बाद भी एक सख्त चेतावनी जारी की है। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि अगर अन्य हड़ताली कर्मचारी भी काम पर नहीं लौटते हैं, तो उन्हें भी बर्खास्त कर दिया जाएगा। सरकार का यह रुख स्पष्ट है कि वह किसी भी कीमत पर राजस्व महाअभियान को बाधित नहीं होने देगी। इस अभियान का उद्देश्य भूमि से संबंधित लंबित मामलों का निपटारा करना और राजस्व संग्रह को बढ़ाना है, जो राज्य के आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
हड़ताल का कारण और सरकार का रुख
राजस्व कर्मियों की हड़ताल वेतन वृद्धि, पदोन्नति और अन्य सेवा शर्तों में सुधार जैसी मांगों को लेकर थी। कर्मचारियों का कहना था कि सरकार उनकी लंबे समय से लंबित मांगों को नजरअंदाज कर रही है। हालांकि, सरकार ने इस हड़ताल को सरकारी कार्यों में बाधा डालने वाला और जनहित के खिलाफ बताया है। सरकार का कहना है कि कर्मियों को अपनी मांगों के लिए सही प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था, न कि हड़ताल जैसे कदम उठाने चाहिए थे, जिससे आम जनता को परेशानी हो। इस कार्रवाई के बाद, बाकी हड़ताली कर्मियों पर भी काम पर लौटने का दबाव बढ़ गया है। यह देखना बाकी है कि क्या अन्य कर्मचारी सरकार की चेतावनी के बाद अपनी हड़ताल समाप्त करते हैं या नहीं।