सिटी पोस्ट लाइव
भोजपुर जिले के परिवहन कार्यालय में मोटर वाहन कर की वसूली में 69 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। मामले में डाटा ऑपरेटर अजय कुमार सिंह पर आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया गया है, लेकिन इस घोटाले में जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ) और नाजिर की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि केवल डाटा ऑपरेटर इतना बड़ा घोटाला नहीं कर सकता, खासकर तब जब इस वसूली की निगरानी की जिम्मेदारी अधिकारियों की थी।
जांच में खुलासा
13 जनवरी 2026 को भोजपुर के जिला परिवहन पदाधिकारी ने नवादा थानाध्यक्ष को आवेदन देकर डाटा ऑपरेटर अजय कुमार सिंह के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंह ने मोटर वाहन कर की राशि 69 लाख 11 हजार 698 रुपये सरकारी खजाने में जमा नहीं की। जांच में पता चला कि डाटा ऑपरेटर द्वारा आरटीपीएस काउंटर से वसूली गई यह राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं हुई थी। इस बारे में सिंह से दो बार पत्राचार किया गया था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, जिससे यह सिद्ध होता है कि उन्होंने सरकारी धन का गबन किया।
डीटीओ और नाजिर की भूमिका पर सवाल
सवाल यह उठता है कि अगर डाटा ऑपरेटर ने राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं की, तो जिला परिवहन अधिकारी और नाजिर क्या कर रहे थे? यह जानकर चौंकाने वाली बात है कि डाटा ऑपरेटर को केवल वसूली का कार्य सौंपा गया था, लेकिन उसके द्वारा की गई गड़बड़ियों पर न तो डीटीओ ने ध्यान दिया और न ही नाजिर ने इसे समय रहते पकड़ा। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह घोटाला हुआ।
किस समय हुआ मामला
3 सितंबर 2024 को डाटा ऑपरेटर को टैक्स वसूली का प्रभार सौंपा गया था, और कुछ ही महीनों में यह बड़ा घोटाला सामने आया। इस मामले के बाद नए डीटीओ ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और 13 जनवरी 2026 को थाने में केस दर्ज किया। आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(4) और 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अब पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और राशि की वसूली के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।