पटना हाईकोर्ट ने 19 जनवरी 2026 (सोमवार) को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए शराबबंदी कानून से जुड़े मामलों में 463 लोगों को जमानत प्रदान की। यह एक ही दिन में जमानत देने का नया रिकॉर्ड है।

दरअसल, जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा की एकल पीठ ने कुल 508 (कुछ रिपोर्टों में 510) शराब से संबंधित मामलों की सुनवाई की। इनमें से अधिकांश में जमानत मंजूर की गई, जबकि कुछ मामलों का अलग से निपटारा हुआ। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून का क्रियान्वयन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। बहुत छोटी मात्रा में शराब बरामद होने पर भी आरोपी लंबे समय तक जेल में रह रहे हैं, जिससे न्यायपालिका पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है। जस्टिस मिश्रा ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि मामूली बरामदगी के बावजूद लोगों को इतनी लंबी जेल अवधि भुगतनी पड़ रही है।

सुनवाई की खास बात यह रही कि हर मामले का औसत निपटारा मात्र 30 सेकंड में किया गया, जो न्यायिक प्रक्रिया की अभूतपूर्व गति थी। इससे अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ काफी हद तक कम हुआ। कोर्ट ने सहायक लोक अभियोजकों (APP) के सहयोग और प्रयासों की भी सराहना की, जिनकी वजह से इतनी बड़ी संख्या में मामलों का त्वरित निपटारा संभव हो सका। वहीं, यह फैसला शराबबंदी कानून के कार्यान्वयन में सुधार की जरूरत को रेखांकित करता है, ताकि छोटे अपराधों या मामूली उल्लंघनों में लोगों को अनावश्यक रूप से जेल न भेजा जाए और न्याय व्यवस्था अधिक संतुलित बनी रहे। इससे पहले एक दिन में करीब 300 जमानतें दी जा चुकी थीं, लेकिन अब 463 के साथ यह रिकॉर्ड टूट गया है।