सिटी पोस्ट लाइव
पूर्णिया के सांसद और कद्दावर नेता पप्पू यादव शुक्रवार को बेउर जेल से रिहा हो गए। जेल की सलाखों से बाहर आते ही उनके तेवर पहले से कहीं अधिक तल्ख और आक्रामक नजर आए। पत्रकारों से बातचीत के दौरान पप्पू यादव ने बिहार की नीतीश सरकार, पुलिस प्रशासन और लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने साफ कहा कि उनकी यह लड़ाई निजी नहीं, बल्कि बिहार की बेटियों और गिरती कानून-व्यवस्था के सम्मान की लड़ाई है।
बिहार की कानून-व्यवस्था पर ‘ब्लैक पेपर’
सांसद पप्पू यादव ने बिहार में बढ़ते अपराध के आंकड़ों को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि बिहार में हर दिन 100 से 150 बच्चियां गायब हो रही हैं। दरभंगा में 6 साल की मासूम और गया में 14 साल की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी का जिक्र करते हुए वे भावुक हो गए। पप्पू यादव ने संकल्प लेते हुए कहा, “बिहार की बेटियों के मान-सम्मान की रक्षा के लिए मैं 100 बार भी मरना पसंद करूँगा, लेकिन पीछे नहीं हटूंगा।” उन्होंने नेताओं और समाज की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल उठाए।
‘अंग्रेजों से भी बदतर है आज की राजनीति’
राजनीति के गिरते स्तर पर टिप्पणी करते हुए पप्पू यादव ने वर्तमान दौर की तुलना अंग्रेजी हुकूमत से कर डाली। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की राजनीति ‘चरित्रहीन’ और ‘प्रतिशोध’ से भरी हुई है। उनके अनुसार, अंग्रेजों के समय भी शायद इतनी गिरावट नहीं थी, जितनी आज के नेताओं में देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि आज की व्यवस्था में यह भरोसा करना मुश्किल है कि कौन अपना है और कौन पराया।
PMCH की बदहाली और जान का खतरा
अपनी सेहत और जेल के अनुभवों को साझा करते हुए सांसद ने प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाज के दौरान PMCH (पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल) में उन्हें 24 घंटे में पीने के लिए एक बोतल पानी तक नसीब नहीं हुआ। पप्पू यादव ने यह भी संकेत दिया कि जेल के भीतर उनकी जान को खतरा था और प्रशासन ने उनके साथ कैदियों जैसा नहीं, बल्कि दुश्मनों जैसा व्यवहार किया। उन्होंने घोषणा की कि वे इस पूरे मामले की शिकायत बिहार विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से करेंगे और जांच की मांग उठाएंगे।
मांझी और शिवानंद तिवारी का जताया आभार
मुश्किल घड़ी में साथ देने वाले वरिष्ठ नेताओं को याद करते हुए पप्पू यादव भावुक दिखे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और दिग्गज नेता शिवानंद तिवारी को अपना ‘अभिभावक’ और ‘पिता समान’ बताया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं के संबल ने उन्हें जेल की तन्हाई में मजबूती दी। अंत में उन्होंने बिहार की जनता से अपील की कि वे बुनियादी मुद्दों और अपने हक के लिए खामोश न रहें।