बिहार के शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जमीन के कागजी काम अब सिरदर्द नहीं बनेंगे। राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए शहरी वंशावली (Genealogy) जारी करने का अधिकार सीधे अंचलाधिकारी (CO) को दे दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस फैसले से सालों से चले आ रहे कानूनी और प्रशासनिक गतिरोध खत्म होने की उम्मीद है। विजय कुमार सिन्हा, उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री ने कहा कि “इस व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों को दफ्तरों की भागदौड़ से बचाना और जमीन से जुड़ी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना है। अब वंशावली के लिए किसी वार्ड पार्षद या शपथ पत्र के भरोसे रहने की जरूरत नहीं है।”
क्या बदला और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
पहले बिहार के शहरों (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत) में वंशावली के लिए कोई ‘सर्टिफाइड’ अथॉरिटी नहीं थी। लोग अपनी सुविधा के अनुसार वार्ड पार्षदों या हलफनामों (Affidavit) का सहारा लेते थे, लेकिन सरकारी स्तर पर इन्हें अक्सर चुनौती दी जाती थी।
नई व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं;
सक्षम प्राधिकारी: अब सिर्फ अंचलाधिकारी ही वंशावली के लिए अधिकृत होंगे।
कानूनी वैधता: CO द्वारा जारी वंशावली को कोर्ट, बैंक और जमीन सर्वे में पूर्ण सरकारी दस्तावेज माना जाएगा।
भ्रष्टाचार पर लगाम: दलालों और बिचौलियों के चक्कर काटने की मजबूरी खत्म होगी।
एक क्लिक पर सामूहिक दाखिल-खारिज;
सरकार ने सिर्फ नियम नहीं बदले, बल्कि प्रक्रिया को डिजिटल भी बनाया है। एक नया पोर्टल लॉन्च किया गया है जिसके माध्यम से परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर बंटवारे और दाखिल-खारिज (Mutation) के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं, अब एक ही झटके में पूरी वंशावली का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा, जिससे भविष्य में धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। बिहार में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण में वंशावली सबसे बड़ी बाधा थी, जो अब दूर हो गई है।