कौन है 100 करोड़ का मालिक इंजीनियर मनोज रजक? पत्नी, भाई और प्रेमिका के नाम पर फैलाया करप्शन का जाल; EOU की बड़ी कार्रवाई…

Ritu Raj

बिहार के बिजली विभाग में भ्रष्टाचार और अय्याशी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मनोज कुमार रजक के ठिकानों पर की गई छापेमारी में न केवल करोड़ों की काली कमाई, बल्कि उनके दोहरे जीवन का भी खुलासा हुआ है।

छापेमारी और बेहिसाब संपत्ति;
EOU की 6 टीमों ने एक साथ बिहार के मधुबनी, दरभंगा, सुपौल और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी सहित 7 ठिकानों पर धावा बोला। करीब 8 घंटे चली इस कार्रवाई में 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का अनुमान लगाया गया है। बता दें कि मनोज ने 2009 में बतौर असिस्टेंट इंजीनियर करियर शुरू किया था। मात्र 17 साल की सेवा में उन्होंने करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। जांच में दरभंगा में आलीशान मकान, सुपौल के करजाइन में तीन भवन और गोदाम, तथा निर्मली में भी एक गोदाम होने की पुष्टि हुई है।

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रिश्तेदारों के नाम पर व्यापार;
इंजीनियर ने अपनी अवैध कमाई को सफेद करने के लिए अपने परिवार का सहारा लिया। पत्नी वीणाश्री के नाम पर दरभंगा-बिरौल पथ पर HPCL का पेट्रोल पंप खोलने के लिए जमीन लीज पर ली। वहीं, भाई संजय रजक के नाम पर सुपौल में गैस एजेंसी चलवाई जा रही थी। इस मामले में भाई को भी सह-अभियुक्त बनाया गया है। सिलीगुड़ी/दार्जिलिंग में पार्टनरशिप में चाय बागान के दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।

नेपाल में ‘आलीशान महल’ और आशिकमिजाजी;
छापेमारी के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा मनोज की पत्नी ने ही किया। पत्नी के अनुसार, मनोज ‘आशिक मिजाज’ किस्म के व्यक्ति हैं और उन्होंने पहली पत्नी के रहते हुए एक रिश्तेदार से दूसरी शादी कर ली। वह अपनी महिला मित्र के लिए नेपाल (सुनसारी जिला) में एक बेहद आलीशान घर बनवा रहे थे। हैरानी की बात यह है कि इस मकान को बनवाने के लिए वे अपने पैतृक गांव से मिस्त्री और मजदूर नेपाल भेजा करते थे।

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