बिहार राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति और ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) की खबरों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। चनपटिया से कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने इन घटनाक्रमों पर खुलकर अपनी बात रखी है।
भाजपा से ऑफर और व्यक्तिगत सिद्धांत;
अभिषेक रंजन ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्हें पाला बदलने के लिए प्रलोभन दिया गया था। उन्होंने कहा कि राजनीति में जोड़-तोड़ आम बात है, लेकिन उनके लिए यह सिद्धांतों की लड़ाई है। साथ ही, उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि वे कांग्रेस की विचारधारा और संविधान बचाने की लड़ाई में मजबूती से खड़े हैं।
‘हॉर्स ट्रेडिंग’ और भाजपा की कार्यशैली पर प्रहार;
विधायक ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वर्तमान में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का माहौल बना हुआ है। उन्होंने नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे पूरी तरह सक्रिय थे, तो चुनाव की नौबत नहीं आने देते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि चुनाव होने पर विधायकों की खरीद-फरोख्त होगी। साथ ही, जो तीन विधायक वोट देने नहीं पहुंचे, उनके बारे में अभिषेक रंजन ने कहा कि उन पर किसी तरह का दबाव या प्रलोभन हो सकता है, लेकिन इसका सही कारण वही बता सकते हैं।
पार्टी के भीतर असंतोष और अनुशासन;
पार्टी के कुछ विधायकों द्वारा महागठबंधन के उम्मीदवार के बजाय मुकेश सहनी या हिना शहाब के समर्थन की बात पर उन्होंने संयमित जवाब देते हुए कहा कि नेतृत्व का आदेश सर्वोपरि होता है और परिवार को एकजुट रखने के लिए कभी-कभी “विष का घूंट” भी पीना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत पसंद कुछ भी हो, लेकिन हाईकमान और महागठबंधन का निर्णय ही अंतिम होता है। साथ ही, उन्होंने गठबंधन की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के साथ हुई बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सभी को एकजुट होकर महागठबंधन के प्रत्याशी के पक्ष में खड़ा रहना है।
भविष्य की रणनीति और निष्ठा;
जब उनसे दल-बदल की संभावनाओं पर सवाल पूछा गया, तो उनका रुख बेहद स्पष्ट था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही उनकी पहचान है और वे यूथ कांग्रेस की उपज हैं, पार्टी ने ही उन्हें पहचान दी है। साथ ही, उन्होंने सम्मान के साथ राजनीति करने की बात कहते हुए स्पष्ट किया कि वे अपना कार्यकाल कांग्रेस के साथ ही पूरा करेंगे। उन्होंने दो टूक कहा, “मैं गद्दारी नहीं करूंगा; यदि कभी पार्टी छोड़नी भी पड़ी, तो चोरी-छिपे नहीं बल्कि पूरे मान-सम्मान के साथ जाऊंगा।”