JDU में फिर ‘नीतीश युग’: आखिर क्यों नीतीश कुमार के बिना अधूरी है पार्टी? ये हैं 5 बड़े कारण…

Ritu Raj

बिहार की राजनीति में एक बार फिर नीतीश कुमार की निर्विवाद स्वीकार्यता पर मुहर लग गई है। उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। यह चौथा अवसर होगा जब नीतीश कुमार पार्टी की कमान संभालेंगे। नई दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने निर्वाचन अधिकारी को उनके नामांकन पत्र सौंपे। इस घटनाक्रम को बिहार और राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

नीतीश का ‘चौथा’ कार्यकाल;
नीतीश कुमार का पार्टी अध्यक्ष बनना महज एक औपचारिकता रह गया है। उनके नेतृत्व के सफर को इन प्रमुख पड़ावों से समझा जा सकता है: पहली बार 2016 में शरद यादव के स्थान पर कमान संभाली, दूसरी बार 2019 में निर्विरोध निर्वाचित हुए, तीसरी बार 2023 में ललन सिंह के इस्तीफे के बाद दोबारा पद संभाला, और चौथी बार 2026 में पुनः नामांकन दाखिल कर अपनी पकड़ मजबूत की।

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नीतीश कुमार ही क्यों? 5 प्रमुख कारण
1) विकल्पहीनता और बड़ा चेहरा: जेडीयू में नीतीश कुमार के कद का कोई दूसरा नेता नहीं है। जानकारों का मानना है कि पार्टी के भीतर उन्होंने कभी अपने बराबर का नेतृत्व पनपने नहीं दिया, जिससे वह आज भी पार्टी के एकमात्र ‘सर्वमान्य’ चेहरे बने हुए हैं।
2) शक्ति का केंद्र बने रहने की इच्छा: राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि मुख्यमंत्री पद से संभावित बदलावों के बीच, नीतीश कुमार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहकर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता और सत्ता पर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं।
3) पार्टी में एकजुटता की चुनौती: जेडीयू के भीतर गुटबाजी और संभावित विद्रोह को रोकने के लिए नीतीश का नाम एक ‘फेविकोल’ की तरह काम करता है। उनके अध्यक्ष रहने से विधायकों और नेताओं में बिखराव का खतरा कम हो जाता है।
4) राष्ट्रीय विस्तार की महत्वाकांक्षा: पार्टी उन्हें एक राष्ट्रीय चेहरे के तौर पर पेश कर बिहार के बाहर अन्य राज्यों (जैसे झारखंड, उत्तर प्रदेश) में भी अपनी जड़ें मजबूत करना चाहती है।
5) भाजपा की रणनीतिक जरूरत: बिहार में नीतीश कुमार के पास लगभग 15% वोट बैंक का आधार माना जाता है। भाजपा जानती है कि यदि नीतीश सक्रिय नहीं रहे, तो यह वोट बैंक राजद (RJD) की ओर शिफ्ट हो सकता है। गठबंधन की मजबूती के लिए भाजपा भी चाहती है कि नीतीश ही जेडीयू की कमान संभालें।

आगे क्या?
आगामी 29 मार्च को पटना में जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद और कार्यकारिणी की बड़ी बैठक होने वाली है। इस बैठक में न केवल नीतीश कुमार के निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा होगी, बल्कि पार्टी की भविष्य की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक विस्तार पर भी अंतिम मुहर लगेगी। हालांकि संजय कुमार झा कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कामकाज देख रहे हैं, लेकिन पार्टी के ‘सुप्रीम कमांडर’ की भूमिका में नीतीश कुमार की वापसी यह दर्शाती है कि जेडीयू फिलहाल बदलाव के बजाय स्थायित्व को प्राथमिकता दे रही है।

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