बिहार की राजनीति में एक युगांतरकारी बदलाव की पटकथा तैयार हो चुकी है। 15 अप्रैल 2026 की तारीख बिहार के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगी, जब पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कोई चेहरा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा। दो दशकों से ‘बड़े भाई’ की भूमिका निभाने वाली जदयू अब ‘छोटे भाई’ के रूप में नई सरकार का हिस्सा बनेगी।

करीब 20 वर्षों तक नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार चलाने के बाद, भाजपा ने अब राज्य की कमान पूरी तरह अपने हाथों में ले ली है। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह और जदयू नेतृत्व के बीच हुए समझौते के तहत सत्ता का नया संतुलन कुछ इस प्रकार होगा।
मुख्यमंत्री: पहली बार भाजपा कोटे से होगा।
उप-मुख्यमंत्री: यह पद अब जदयू के खाते में जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर): भाजपा इस महत्वपूर्ण पद को अपने पास ही रखेगी।
गृह विभाग: सत्ता की असली चाबी यानी गृह मंत्रालय भी भाजपा के पास रहेगा।

कैबिनेट का ’15-15′ फॉर्मूला;
| पार्टी | संभावित मंत्रियों की संख्या |
| भाजपा (BJP) | 15 |
| जदयू (JDU) | 15 |
| LJP (रामविलास) | 02 |
| HAM (मांझी) | 01 |
| RLM (कुशवाहा) | 01 |

पिछले 20 सालों से सत्ता के केंद्र में रही जदयू के लिए यह एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है। जदयू न केवल मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवा रही है, बल्कि उसे स्पीकर और गृह विभाग जैसे प्रभावशाली पदों से भी हाथ धोना पड़ा है। भाजपा अब बराबरी के बजाय ‘बड़े भाई’ के वर्चस्व के साथ सरकार चलाएगी। संभावना है कि 15 अप्रैल को केवल मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री शपथ लेंगे, जबकि अन्य मंत्रियों का विस्तार बाद में किया जाएगा।
नई सरकार में केवल चेहरे ही नहीं, बल्कि मंत्रालयों का रसूख भी बदलेगा। सूत्रों का दावा है कि भारी-भरकम और अधिक बजट वाले विभाग भाजपा अपने पास रखेगी। मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बड़े बदलाव के संकेत हैं ताकि विकास कार्यों में भाजपा अपनी छाप छोड़ सके। भाजपा ने हाल ही में अपने कई दिग्गज नेताओं को सरकार से संगठन और संगठन से सरकार में भेजने की तैयारी पूरी कर ली है।