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पटना: हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है, जो पूर्णिमा की रात को घटित होती है। इस दौरान, जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के बीच आ जाती है, तब चंद्र ग्रहण लगता है। इस वर्ष यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह होली के दिन पड़ रहा है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है। साल 2025 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण 14 मार्च को होगा। जिसे ब्लड रेड मून के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर होली मनाई जाएगी। इस दिन संध्या के समय होलिका दहन किया जाएगा और अगले दिन यानी 15 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। ग्रहण का यह संयोग इस पर्व को और भी खास बना देगा।
पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान, जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी द्वारा अवरुद्ध हो जाता है, तब चंद्रमा पर केवल वही प्रकाश पहुंचता है, जो पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरता है। वायुमंडल में मौजूद धूल और अन्य कण मुख्य रूप से नीली रोशनी को बिखेर देते हैं, जिससे चंद्रमा पर केवल लाल रंग की रोशनी पड़ती है। इसी कारण चंद्रमा लालिमा लिए हुए नजर आता है, जिसे ‘ब्लड रेड मून’ कहा जाता है। यह चंद्र ग्रहण दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, प्रशांत महासागर, ऑस्ट्रेलिया, अटलांटिक महासागर, यूरोप और एशिया के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।
भारत में यह ग्रहण दृश्य नहीं होगा, क्योंकि उस समय यहां दिन रहेगा। यही कारण है कि सूतक काल का प्रभाव भी मान्य नहीं होगा। यदि इस दिन होलिका दहन किया जाता है, तो धार्मिक दृष्टि से भी यह ग्रहण अधिक प्रभावशाली नहीं माना जाएगा। इस ग्रहण का कोई आध्यात्मिक प्रभाव नहीं रहेगा, लेकिन खगोलीय दृष्टिकोण से यह एक रोमांचक घटना होगी।