.सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (एसआईआर) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.इस दौरान अदालत ने राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त किए गए बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) से कहा कि अगर किसी मतदाता का नाम ड्राफ़्ट मतदाता सूची में नहीं है तो वे आपत्तियां दर्ज करने में मतदाताओं की मदद करें.सुनवाई कर रही बेंच में शामिल जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा, “हमें यह देखकर हैरानी है कि 1.68 लाख बीएलए ने अब तक सिर्फ़ दो आपत्तियाँ दाखिल की हैं.”उन्होंने निर्देश दिया, “सभी 12 राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दें कि वे ऐसे फ़ॉर्म भरने में मतदाताओं की मदद करें.”
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि अगर सभी बीएलए दावों की जांच में शामिल हो जाएं, तो यह प्रक्रिया कुछ ही दिनों में पूरी हो जाएगी.मतदाता का नाम शामिल करने को लेकर अदालत ने कहा कि बीएलए उन 11 दस्तावेज़ों में से किसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जिनका उल्लेख चुनाव आयोग ने पहले किया था.साथ ही अदालत ने कहा कि बीएलए इसके लिए आधार कार्ड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.अदालत ने राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों को भी मामले में शामिल किया और उनसे स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल करने को कहा. अदालत ने 14 अगस्त के अपने आदेश को दोहराया कि मतदाताओं को ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा मिलनी चाहिए और फ़िजिकल फ़ॉर्म्स अनिवार्य नहीं होना चाहिए.