बिहार चुनाव 2025: पीएम मोदी की मधुबनी रैली में भीड़ जुटाने को लेकर JDU-BJP एक्टिव

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
भारत में चुनावी माहौल जब तेज़ होता है, तो नेताओं की जनसभाएं और रैलियाँ उसका अहम हिस्सा बन जाती हैं। बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं, और इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 24 अप्रैल को मधुबनी जिले के झंझारपुर में होने वाली रैली को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) इस रैली को सफल बनाने में पूरी ताकत झोंक रहा है। बीजेपी के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) भी जनसभा में भीड़ जुटाने के लिए ज़ोर-शोर से मेहनत कर रही है।
ललन सिंह का अल्टीमेटम
केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने इस रैली को लेकर एक सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जो भी नेता 2025 के विधानसभा चुनाव में टिकट का दावेदार है, वह अपनी विधानसभा से कम से कम 5,000 लोगों को पीएम मोदी की रैली में लेकर आए। यह बयान साफ़ करता है कि इस बार एनडीए केवल भाषण नहीं, ज़मीन पर जनसमर्थन भी देखना चाहता है।
मुजफ्फरपुर में हुई एक बैठक में ललन सिंह ने मौजूदा विधायकों के साथ-साथ उन इलाकों के दावेदारों को भी यह निर्देश दिया, जहां फिलहाल एनडीए का विधायक नहीं है।
रैली की तैयारियाँ जोरों पर
मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सुपौल, मुजफ्फरपुर जैसे आस-पास के जिलों में रैली को लेकर बड़ी तैयारियाँ चल रही हैं। गांव-गांव, कस्बों और प्रखंडों में कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को रैली में आने के लिए न्योता दे रहे हैं। पोस्टर, प्रचार वाहन और सोशल मीडिया के ज़रिए भी माहौल बनाया जा रहा है।
राजनीतिक महत्त्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह रैली चुनावी दृष्टिकोण से बेहद अहम मानी जा रही है। यह केवल एक जनसभा नहीं, बल्कि यह एनडीए के शक्ति प्रदर्शन का मंच भी है। इससे ये भी तय होगा कि जनता का रुझान किस ओर है और कौन से नेता वास्तव में जनता के बीच सक्रिय हैं।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मधुबनी रैली बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। एनडीए इसे पूरी ताकत से सफल बनाने में लगा है, और नेताओं के लिए यह एक प्रकार की परीक्षा भी है। अब देखना यह है कि कौन इस रैली के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत साबित करता है और किसे टिकट की दौड़ से बाहर होना पड़ता है

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