सिटी पोस्ट लाइव : बिहार कांग्रेस के नये प्रभारी कृष्णा अल्लावारु प्रदेश अध्यक्ष पद से अखिलेश सिंह को हटाने के बाद प्रखंड से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन में बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं.अखिलेश सिंह के चहेतों की भी छुट्टी होने वाली है. प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू खुद अपनी निगरानी में इस फेरबदल को अंजाम दे रहे हैं. 3 अप्रैल को कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ जिलाध्यक्षों की बैठक होनी है. इससे पहले ही बिहार कांग्रेस के नए जिलाध्यक्षों की घोषणा हो सकती है.
राहुल गांधी की नई राजनीतिक समीकरण के तहत राजेश राम को बिहार कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. उन्हें प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू का भरोसेमंद माना जा रहा है.दिसंबर 2022 में प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अखिलेश सिंह ने मई 2023 में एक साथ 39 जिलाध्यक्षों की घोषणा की थी. उन्होंने 39 में से 26 जिलों की कमान सवर्ण जिलाध्यक्षों के हाथ में दी थी. इनमें 11 जिलों में भूमिहार, 8 जिलों में ब्राह्मण, 6 जिलों राजपूत और 1 जिले में कायस्थ समाज के नेता को जिलाध्यक्ष बनाया था.5 जिलों में मुस्लिम, 4 जिलों में यादव, 3 दलित और मात्र 1 कुशवाहा चेहरों को जिलाध्यक्ष की लिस्ट में शामिल किया था. 39 जिलाध्यक्षों की लिस्ट में केवल दो महिला को जिलाध्यक्ष बनाया गया था.
2017 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है, जब जिलाध्यक्ष के साथ कार्यसमिति का गठन होने जा रहा है. बिहार कांग्रेस में आखिरी बार 2013 में अशोक चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष रहते जिला से लेकर प्रदेश स्तर पर संगठन का गठन किया था. इनके बाद 4 प्रदेश अध्यक्ष और तीन प्रदेश प्रभारी बदल चुके हैं, लेकिन कार्यसमिति का गठन नहीं हो पाया है.प्रखंड, जिला और प्रदेश स्तर पर पदाधिकारियों के चयन के लिए स्टेट लीडरशीप की तरफ से 6 सदस्यीय स्क्रिनिंग कमेटी का गठन किया गया है. इसका संयोजक प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार को बनाया गया है. विधानसभा में विधायक दल के नेता शकील अहमद खान और विधान परिषद दल के नेता मदन मोहन झा को सदस्य बनाया गया है.
पार्टी के तीन प्रभारी सचिव देवेंद्र यादव, शाहनबाज आलम, और सुशील कुमार पासी को भी सदस्य बनाया गया है.इसमें निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह को जगह नहीं मिली है. कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी ने कहा कि ’कांग्रेस पार्टी की शुरू से ही सोच रही है कि सारे लोगों को साथ लेकर चलें. प्रयास ये होता है कि जहां का संतुलन बिगड़ा हुआ है, उसे हम सही करें. बिगड़े हुए संतुलन को हम ठीक करने का प्रयास करेंगे. स्क्रिनिंग कमेटी के सदस्य और विधानसभा में विधायक दल के नेता शकील अहमद के अनुसार ’जिलाध्यक्षों के लिए स्क्रिनिंग की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. राज्य के प्रभारी सचिव पिछले तीन महीने से लगातार जिले में घूम रहे हैं तो वे लगभग चीजें साफ हो गई हैं. नई लिस्ट में सामाजिक न्याय का इसमें पूरा ख्याल रखा जाएगा.