चिराग पासवान को बिहार की सियासत में एक बड़े नेता के रूप में स्थापित कर सकती है यह रैली .

Rahul
By Rahul

सिटी पोस्ट लाइव : वीर कुँवर सिंह की धरती आरा से शाहाबाद मे चुनावी शंखनाद करने चिराग पासवान जा रहे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान आरा के रामना मैदान में नव संकल्प महासभा को संबोधित करेंगे ।  चिराग की सियासी महत्वाकांक्षा से जुड़ी यह रैली चिराग को बिहार की सियासत में एक बड़े नेता के रूप में स्थापित कर सकती है।शाहाबाद जो कभी एनडीए का गढ़ था आज महागठबंधन का अभेद क्षेत्र बन गया है। अगर चिराग यहाँ करिश्मा दिखा पाते हैं तो एनडीए की मजबूरी बन जायेगें।

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चिराग की नजर 2025 के विधानसभा चुनाव पर है और वह शाहाबाद क्षेत्र की किसी सामान्य सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं.वो केवल दलित नेता नहीं बल्कि लोकप्रिय युवा नेता बनना चाहते हैं। चिराग पासवान अपनी इस रैली के माध्यम से एनडीए की एकजुटता का संदेश देते भी नजर आएंगे. चिराग ने हाल ही में कहा कि उनकी पार्टी गठबंधन  धर्म का पालन करेगी और सीट बंटवारे में बीजेपी और जेडी(यू) के साथ तालमेल बनाए रखेगी. राजनीति के जानकार कहते हैं कि आरा की रैली के माध्यम से चिराग पासवान शाहाबाद क्षेत्र के सात जिलों के एनडीए कार्यकर्ताओं को एकजुट करेंगे. ऐसे में एनडीए के लिए शाहाबाद क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर है. 2020 में गठबंधन को 22 में से केवल 2 सीटें मिली थीं.

चिराग पासवान की साफ-सुथरी छवि, सभी वर्गों को आकर्षित करने वाला व्यक्तित्व और युवा अपील एनडीए को शहरी और ग्रामीण मतदाताओं, खासकर पासवान समुदाय (5.3% आबादी) और अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच पैठ बनाने में मदद कर सकती है. चिराग की रैली नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है.  चिराग 40 सीटों पर दावा ठोक रहे हैं । दूसरी ओर चिराग पसवान की यह रैली महागठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती है.

दरअसल, चिराग का दलित वोट बैंक, खासकर पासवान समुदाय महागठबंधन के लिए खतरा है. 2020 के चुनाव में महागठबंधन ने 110 सीटें जीती थीं. इस गठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के अतिरिक्त फिलहाल वीआईपी सहित छह दल हैं. लेकिन, 2020 के चुनाव में कांग्रेस की कमजोर स्ट्राइक रेट (70 में से 19 सीटें) ने गठबंधन को सत्ता से दूर रखा. इस बीच चिराग पासवान की सक्रियता इस बार एनडीए को दलित और ओबीसी वोटों में सेंध लगाने में मदद कर सकती है जिससे महागठबंधन का गणित बिगड़ सकता है.

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