Bihar Politics:
सिटी पोस्ट लाइव : इसबार विधान सभा चुनाव में बीजेपी फूंक फूंक कर हर कदम रख रही है.बीजेपी कोई किल काँटा नहीं छोड़ना चाहती.वैसे नेताओं को जिन्हें वो टिकेट नहीं देने जा रही है, बोर्ड और आयोग में एडजस्ट कर रही है.चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कई वरिष्ठ और युवा नेताओं को पार्टी ने बोर्ड-आयोग में जगह दे दी है.जो बचे थे उन्हें जिला प्रभारी बना दिया है.लेकिन यहाँ भी चूक हो गई है. कई नेताओं को अपने से कम अनुभवी कार्यकर्ताओं के अधीन काम करना होगा जिससे वे असहज हैं. कुछ नेताओं ने पार्टी नेतृत्व को सूचित किया है कि वे इस जिम्मेदारी को नहीं निभा पाएंगे क्योंकि यह उनके कद के अनुसार नहीं है.
प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रदेश मंत्री, विभिन्न मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभाल चुके विधानसभा चुनाव लड़ने का सपना संजोने वाले बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं को नेतृत्व ने जिलों का प्रभारी बनाकर झटका दिया है.जिला प्रभारी बनाए गए कई नेताओं की पीड़ा यह है उन्हें कभी अधीनस्थ रहे कार्यकर्ताओं के नीचे का काम करना होगा. इसे ध्यान में रखते हुए कुछ नेताओं ने सीधे तौर पर नेतृत्व को तो कई ने दूसरे माध्यम से दायित्व संभालने से भी किनारा करने की सूचना दे दी है. कई वरिष्ठता की अनदेखी से आहत हैं.कुछ एक नेताओं की शिकायत है कि लंबी अवधि तक पार्टी की सेवा करने के उपरांत उन्अहें चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है.
कई जिला प्रभारियों का दावा है कि वह विधायकी लड़ने के लिए अपने चिह्नित क्षेत्र में वह निरंतर जुड़े हुए हैं. प्रदेश नेतृत्व के साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इससे अवगत भी करा दिया है. अब उचित अवसर एवं समय की प्रतीक्षा है.उल्लेखनीय है कि भाजपा ने 52 संगठनात्मक जिलों में भाजपा ने कई पूर्व जिलाध्यक्ष को भी प्रभारी का दायित्व दिया है.भाजपा ने कई कार्यकर्ताओं एवं वरिष्ठ नेताओं के साथ पार्टी के पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों को सरकार की ओर से नवगठित आयोग, बोर्ड एवं निगम में विभिन्न श्रेणी के पदों पर समायोजित किया गया है. इसमें से भी कई नेताओं ने दायित्व ग्रहण करने से किनारा कर लिया है.नेताओं का तर्क है कि उन्हें जो पद दिया गया है, वह उनके कद के अनुसार नहीं है.कईयों ने दायित्व ग्रहण करने से इनकार कर दिया है.