तेजस्वी के ख़िलाफ़ बोलने वाले कांग्रेसियों पर कांग्रेस ने लिया ऐक्शन, कई और नपेंगे!

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
पटना:
लगता है राजद के युवराज तेजस्वी के दिल्ली दौरे का इंपैक्ट बहुत तेज़ी से दिखने लगा है। कांग्रेस पार्टी ने उन नेताओं परा कार्रवााई करनी शुरू कर दी है जो लगातार तेजस्वी यादव के खिलाफ आग उगल रहे थे और उन्हें सीएम कैंडिडेट न बनाने की मांग कर रहे थे। कांग्रेस ने इसकी शुरुआत बिहार कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश कुमार के करीबी यशवंत कुमार चमन से की है। बिहार कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम ने परसों रात बिहार के 40 जिलों के पर्यवेक्षकों की लिस्ट जारी की थी।

इसमें यशवंत कुमार चमन का भी नाम था, यशवंत कुमार चमन को भी पर्यवेक्षक बनाया गया था, ये वही यशवंत कुमार चमन है जिन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था कि तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। इसलिए तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम फ़ेस नहीं होना चाहिए। इतना ही नहीं, चमन ने राजेश राम को सीएम कैंडिडेट बनाए जाने की मांग कर दी थी। अब कांग्रेस पार्टी ने यशवंत कुमार चमन के खिलाफ ऐक्शन ले लिया है। कांग्रेस ने यशवंत कुमार को पर्यवेक्षक पद से हटा दिया और साथ ही चमन को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।

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बिहार में महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर कांग्रेस और आरजेडी में खींचतान जारी है। आज तेजस्वी यादव और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की दिल्ली में मुलाकात होनी है। तेजस्वी यादव की आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात हो सकती है। इस मुलाकात से पहले, कांग्रेस ने यशवंत कुमार चमन को कारण बताओ नोटिस जारी किया। चमन ने राजेश राम को सीएम बनाने की मांग की थी। परसों रात जारी हुई सूची में यशवंत कुमार चमन को गोपालगंज का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। सूत्रों के मुताबिक निश्चित तौर पर चमन के खिलाफ यह कार्रवाई राजेश कुमार ने तो नहीं की है, क्योंकि परसों रात पर्यवेक्षकों की लिस्ट तो उनकी तरफ़ से ही जारी हुई थी।

चमन के खिलाफ यह ऐक्शन दिल्ली से आए निर्देश के बाद हुई है। हालांकि मीडिया में यशवंत कुमार चमन का बयान आने के बाद राजेश राम ने सफाई भी दी थी। राजेश राम ने कहा था कि, ‘मैं एक साधारण कार्यकर्ता हूं। पार्टी ने मुझे गठबंधन को मजबूती देने का काम सौंपा है, मैं उसी में लगा हुआ हूं। जिस तरह की बात सामने आ रही है, मैंने उनका बयान सुना नहीं है, लेकिन अगर फिर भी उन्होंने ऐसा कहा है तो उसपर तत्काल विराम लगना चाहिए। अगर किसी की भावना का असर संबंधों पर आ रही है तो यह बिलकुल ठीक नहीं है।

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