बिहार की राजधानी पटना में एक बार फिर आंदोलनों का दौर शुरू हो गया है। शिक्षक अभ्यर्थी इस बार TRE-4 की वैकेंसी की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। गांधी मैदान में भारी संख्या में जुटे कैंडिडेट्स ने बिहार सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि अब उन्हें ‘आश्वासन’ नहीं, बल्कि ‘अधिसूचना’ चाहिए।

चुनावी वादे और जमीनी हकीकत का टकराव;
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि सरकार ने चुनाव से पहले वैकेंसी की झड़ी लगाने की बात कही थी। लेकिन चुनाव बीत जाने के कई महीनों बाद भी TRE-4 का कहीं अता-पता नहीं है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि हजारों अभ्यर्थी वर्षों से कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन परीक्षा न होने से उनका मानसिक और आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी की वजह से कई छात्रों की उम्र सीमा खत्म होने के कगार पर है।

शिक्षा मंत्री के ‘शीघ्र’ पर छात्र नेता खुशबू पाठक का तीखा प्रहार;
आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं छात्र नेता खुशबू पाठक ने सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए कहा- “जब भी हम शिक्षा मंत्री से जवाब मांगते हैं, तो रटा-रटाया जवाब मिलता है कि ‘रोस्टर क्लीयरेंस’ की प्रक्रिया चल रही है। हम पूछना चाहते हैं कि आखिर ये रोस्टर क्लीयरेंस कब तक चलेगा? मंत्री जी का ‘शीघ्र’ शब्द आखिर किस कैलेंडर का हिस्सा है, यह किसी अभ्यर्थी की समझ में नहीं आ रहा।”

बजट सत्र को लेकर दी ‘आर-पार’ की चेतावनी;
छात्रों ने केवल प्रदर्शन ही नहीं किया, बल्कि सरकार को सीधी चेतावनी भी दे डाली है। छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने तत्काल प्रभाव से TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया, तो आने वाले विधानसभा बजट सत्र के दौरान पटना की सड़कों पर अब तक का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन होगा। अभ्यर्थी अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने साफ किया है कि इस बार आंदोलन केवल गांधी मैदान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे बिहार के छात्र एकजुट होकर सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे।