Bihar Politics:
सिटी पोस्ट लाइव : मिथिलांचल में अपनी खो हुई ताकत को फिर से वापस पाने के लिए तेजस्वी यादव ने अपना ट्रंप कार्ड खेला है. उनके अतिपिछड़ा का सियासी दांव से बिहार की राजनीति मे हलचल है. उन्होंने 75 साल के नेता बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सह पूर्व सांसद तथा जदयू के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मंगनीलाल मंडल को पार्टी का का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है.
मंगनीलाल मंडल अतिपिछड़ा समाज से आते हैं. अब तक आरजेडी या किसी भी राजनीतिक दल ने बिहार में भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर के बाद किसी अतिपिछड़ा को पार्टी की कमान नहीं सौंपी थी. तेजस्वी यादव खुद इसे प्रचारित भी कर रहे हैं. असल में मिथिलांचल के मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सुपौल और दूसरे जिलों में एनडीए की विधानसभा में सीटें ज्यादा हैं.आरजेडी इन क्षेत्रों में कमजोर है. इन क्षेत्रों में अतिपिछड़ा वोटों की संख्या प्रभावशाली है. ऐसे में अतिपिछड़ा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर आरजेडी ने उस वर्ग को विशेष संदेश देने की कोशिश की है.
यह प्रयोग कितना कारगर होगा यह आने वाले विधानसभा चुनाव के परिणाम से पता चलेगा. फिलहाल राजद के कार्यकर्ता पार्टी के इस निर्णय से खुश और उत्साहित हैं. फुलपरास प्रखंड के गोरगमा में एक मजदूर परिवार में 1949 ई में जन्मे मंगनी लाल मंडल का राजनीतिक सफर एआईएसएफ से शुरू हुआ, लेकिन 1967 में डॉ. राममनोहर लोहिया एवं मधुलमय के विचार से प्रभावित होकर लोकदल में शामिल हो गए. उन्हें छात्र राजनीति के समय ही भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर के साथ लंबे समय तक काम करने का मौका मिला था. वे 1977 में युवा लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष एवं 1980 में लोकदल के प्रदेश मंत्री एवं बाद में महामंत्री बने. वे वर्ष 1986 से 2004 तक लगातार 18 वर्षो तक बिहार विधान परिषद के सदस्य तथा बिहार सरकार में मंत्री भी रहे है.
वर्ष 2004 से 2009 तक आरजेडी से राज्यसभा एवं 2009 से 2014 तक जेडीयू लोकसभा के सदस्य रहे है. 2014 में आरजेडी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए. 2019 में जेडीयू में शामिल हुए तथा पार्टी में एक मात्र राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए, लेकिन वर्ष 2024 के लोकसभा में प्रत्याशी नहीं बनाए जाने तथा अतिपिछड़ा समुदाय के बड़े नेताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पार्टी से बगावत कर दिया. जिसके कारण जदयू के राष्ट्रीय कार्यसमिति से बाहर कर दिया गया. इन्होंने 06 जनवरी, 2025 को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव एवं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव से मिलकर आरजेडी में शामिल होने का निर्णय लिया.