बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर के अपमान के लिए लालू या बीजेपी किसे मांगनी चाहिए माफी?

Rahul
By Rahul

सिटी पोस्ट लाइव : आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के  जन्मतिथि पर बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर के तथाकथित अपमान को लेकर सियासत तेज है. बीजेपी ने लालू यादव के  पैर के पास भीमराव आंबेडकर की तस्वीर रखने का आरोप लगाते हुए आंदोलन की धमकी दे रही है. बीजेपी के तमाम नेता इस मुद्दे पर लालू यादव को घेरने मे जुटे हैं.   नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर मुद्दे को भटकाने का आरोप लगा रहे हैं.

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने इसे गंभीरतापूर्वक लेते हुए राजद प्रमुख लालू यादव पर माफी मांगने का दबाव बढ़ा दिया है. जायसवाल ने कहा कि लालू प्रसाद अनुसूचित समाज से माफी मांगें नहीं तो भाजपा उनके विरुद्ध प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी. उन्होंने  आरोप लगाया है कि लालू यादव ने अनुसूचित जाति समाज के पूज्य एवं देश के मसीहा डॉ. भीमराव आंबेडकर का अपमान किया है.

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लेकिन सच्चाई जानकार बीजेपी नेताओं के पैर तले जमीन खिसक जाएगी. जिस तस्वीर को लेकर बीजेपी नेता लालू यादव पर भीमराव आंबेडकर की तस्वीर के अपमान का आरोप लगा रहे हैं, वह तस्वीर लालू यादव की जगह उन्हें शर्मसार कर देनेवाली है.तस्वीर मे साफ दिखाई दे रहा है कि लालू यादव एक कुर्सी पर बैठे लोगों से गिरे हुए हैं. लोग उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं. लालू यादव के दोनों पर उनके समनेवाली कुर्सी पर टिकी है. इस बीच कोई एक तस्वीर लेकर लालू प्रसाद के पैर के पास आकार खड़ा  हो जाता है. उसके हाथ मे जो तस्वीर है उसे लालू यादव नहीं देख रहे हैं क्योंकि उस व्यक्ति ने अपने हाथ से तस्वीर को ऐसे पकड़ रखा है जिसे लालू यादव के सामने खड़े लोग ही देख सकते हैं . जाहिर  है लालू यादव ने देखा ही नहीं कि अपने हाथ मे किसकी तस्वीर लेकर वो सखश अपनी तस्वीर उनके पैरों के पास खड़ा होकर  खिंचवा रहा है .

ये विडिओ ये बताने के लिए काफी है कि डोसग लालू यादव का नहीं क्योंकि उन्होंने तो देखा ही नहीं कि तस्वीर किसकी है.  भीमराव आंबेडकर की तस्वीर लेकर लालू यादव के पास पहुंचे व्यक्ति  ने तस्वीर लालू यादव को दिखाई ही नहीं. आया और लालू यादव की तरफ अपनी पीठ कर अपने हाथों मे सामने से भीमराव आंबेडकर की तस्वीर लेकर अपनी तस्वीर खिंचवाने लगा.77 साल के लालू यादव को ऐसे मे भीमराव आंबेडकर की तस्वीर का अपमान करने का आरोप लगाना शर्मनाक लगता है .

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