सिटी पोस्ट लाइव : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले बीजेपी एक बार फिर जाति-समीकरण को साधने पर जोर लगा रही है. इसके तहत जातीय रैली सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. हर विधानसभा क्षेत्र कम से कम चार से पांच सम्मेलन होगा. मतों के गणित में विधानसभावार सामाजिक वर्चस्व या सर्वाधिक आबादी वाली जातियां होंगी. जिस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति में पासवान (दुसाध), ऋषिदेव, सदा, मुसहर, मांझी, भुइयां एवं राजावर समाज के मतदाता अधिक हैं तो उनमें गौरेया बाब, रविदास महाराज, डा. भीम राव आंबेडकर या अन्य सामाजिक महापुरुषों के नाम पर सम्मेलन होगा.
क्षत्रिय समाज की बहुलता वाली सीट पर महाराणा प्रताप या वीर कुंवर सिंह आदि के नाम पर आयोजन किया जाएगा.वैश्य मतदाताओं को साधने के लिए भामा शाह सम्मेलन किया जाएगा.आयोजन की तिथि तय करने के उपरांत प्रदेश नेतृत्व की ओर पार्टी के जाति विशेष के वरिष्ठ नेताओं, केंद्र या राज्य सरकार में सम्मिलित मंत्री, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, पार्टी पदाधिकारी को संबोधन के लिए मुख्य अतिथि, विशिष्ठ अतिथि एवं सम्मेलन के उद्घाटनकर्ता के तौर पर भेजा जाएगा.भाजपा का जातिगत सम्मेलन कराने का उद्देश्य कुर्मी और कुशवाहा समाज को साधना है.
केंद्र से लेकर भाजपा शासित प्रदेशों में पिछले एक दशक में पार्टी की ओर से नेतृत्व से वंचित समाज को उभारने पर विशेष जोर है.संगठन से लेकर सरकार में भागीदारी बढ़ाने के साथ सर्व समाज को लेकर चलने की रणनीति पर भी भाजपा फोकस कर रही है.इसका उदाहरण नीतीश सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार है. वर्तमान में नीतीश सरकार के केंद्र भाजपा की ओर से सर्वोपरि लक्ष्य में कुशवाहा (कोईरी) कुर्मी, धानुक एवं चंद्रवंशी समाज हैं. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं उप मुख्यमंत्री रहते हुए सम्राट चौधरी ने कुर्मी समाज की नेत्री अनामिका सिंह पटेल को विधान परिषद भेजा तो चंद्रवंशी समाज के वरिष्ठ नेता डा. भीम सिंह को राज्यसभा भेजकर दूरगामी संदेश दिया.दिलीप जायसवाल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभालने के उपरांत कुर्मी समाज के कृष्ण कुमार मंटू को नीतीश मंत्रिमंडल में सम्मिलित कर भाजपा कोटे से पहली बार कुर्मी समाज को प्रतिनिधित्व दिया.