सिटी पोस्ट लाइव : बिहार देश का ऐसा पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां मोबाइल के ज़रिए ऑनलाइन वोटिंग होगी. यह ई-वोटिंग 28 जून को बिहार के नगरपालिका चुनाव से शुरू होगी.इस प्रणाली के लिए 51,155 मतदाताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें 26,038 पुरुष और 25,117 महिला मतदाता शामिल हैं. पटना, पूर्वी चंपारण, रोहतास, गया, बक्सर, बांका, सारण और सिवान की नगरपालिकाओं में होने वाले इन चुनावों में सबसे ज़्यादा रजिस्ट्रेशन बक्सर से हुआ है.बिहार राज्य के निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद के अनुसार “देश में पहली बार बिहार राज्य में ऐसा होने जा रहा है. दुनिया के कुछ ही देशों में ऐसा होता है, जिनमें एस्टोनिया एक उदाहरण है. यह सुविधा उन मतदाताओं के लिए है जो वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांग, गंभीर बीमारी से पीड़ित, गर्भवती महिला या प्रवासी मज़दूर हैं.पारंपरिक वोटिंग सुबह 7 से शाम 5 बजे तक चलेगी, जबकि ई-वोटिंग केवल सुबह 7 से दोपहर 1 बजे तक ही हो सकेगी.
जिन मतदाताओं ने खुद को ई-वोटिंग के लिए रजिस्टर किया है, उन्हें अपने मोबाइल पर एक ऐप डाउनलोड करना होगा.नगरपालिका आम निर्वाचन 2025 के लिए एसईसीबीएचआर (SECBHR) ऐप और उप निर्वाचन के लिए एसईसीबीआईएचआर (SECBIHAR) ऐप का उपयोग किया जाएगा.ये ऐप केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ही काम करेंगे. एक विकल्प राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के ज़रिए भी उपलब्ध है, लेकिन वह भी केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही सक्रिय होगा.निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद ने बताया, “मतदान में किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसलिए केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही मतदान मान्य होगा. एक नंबर से अधिकतम दो लोग (जैसे पति-पत्नी) वोट डाल सकते हैं. इस प्रयोग को लेकर अच्छा रेस्पॉन्स मिला है. सिवान, पूर्वी चंपारण के साथ-साथ दुबई और क़तर जैसे देशों में रहने वाले प्रवासी मतदाता भी रजिस्टर हुए हैं.”
बिहार लंबे समय से पलायन की समस्या झेल रहा है. समाजशास्त्रियों के अनुसार, यहां मतदान कम होने की एक बड़ी वजह यही है.इसी वजह से राज्य निर्वाचन आयोग इस पहल को “मतदान फ़ीसदी बढ़ाने के एक बड़े साधन” के रूप में देख रहा है.लेकिन ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता इस पर सवाल उठा रहे हैं.उनका कहना है कि मोबाइल फोन महिलाओं और बुज़ुर्गों की पहुंच में नहीं है. ज़्यादातर महिलाओं के पास सामान्य फोन होते हैं, स्मार्टफोन नहीं. इसके अलावा रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में पढ़ना-लिखना भी शामिल है, जो बिना प्रशिक्षण के महिलाओं और दूसरे वर्गों के लिए मुश्किल है.”
जिन मतदाताओं ने खुद को ई-वोटिंग के लिए रजिस्टर किया है, उन्हें अपने मोबाइल पर एक ऐप डाउनलोड करना होगा.नगरपालिका आम निर्वाचन 2025 के लिए एसईसीबीएचआर (SECBHR) ऐप और उप निर्वाचन के लिए एसईसीबीआईएचआर (SECBIHAR) ऐप का उपयोग किया जाएगा.ये ऐप केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ही काम करेंगे. एक विकल्प राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के ज़रिए भी उपलब्ध है, लेकिन वह भी केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही सक्रिय होगा.निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद ने बताया, “मतदान में किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसलिए केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही मतदान मान्य होगा. एक नंबर से अधिकतम दो लोग (जैसे पति-पत्नी) वोट डाल सकते हैं. इस प्रयोग को लेकर अच्छा रेस्पॉन्स मिला है. सिवान, पूर्वी चंपारण के साथ-साथ दुबई और क़तर जैसे देशों में रहने वाले प्रवासी मतदाता भी रजिस्टर हुए हैं.”
बिहार लंबे समय से पलायन की समस्या झेल रहा है. समाजशास्त्रियों के अनुसार, यहां मतदान कम होने की एक बड़ी वजह यही है.इसी वजह से राज्य निर्वाचन आयोग इस पहल को “मतदान फ़ीसदी बढ़ाने के एक बड़े साधन” के रूप में देख रहा है.लेकिन ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता इस पर सवाल उठा रहे हैं.सामाजिक कार्यकर्ता शाहिना परवीन कहती हैं, “मोबाइल फोन महिलाओं और बुज़ुर्गों की पहुंच में नहीं है. ज़्यादातर महिलाओं के पास सामान्य फोन होते हैं, स्मार्टफोन नहीं. इसके अलावा रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में पढ़ना-लिखना भी शामिल है, जो बिना प्रशिक्षण के महिलाओं और दूसरे वर्गों के लिए मुश्किल है.”
तकनीकी आंकड़े भी इस स्थिति की पुष्टि करते हैं. प्रेस इन्फॉरमेशन ब्यूरो के अनुसार, बिहार की टेलीडेंसिटी 57.23 फ़ीसदी है, जबकि राष्ट्रीय औसत 85.04 फ़ीसदी है.बिहार आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक़, राज्य में इंटरनेट डेंसिटी 42.1 फ़ीसदी है, जबकि देश भर में यह आंकड़ा 68.19 फ़ीसदी है. इंटरनेट डेंसिटी यानी किसी क्षेत्र में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या का अनुपात. ये बताता है कि किसी क्षेत्र में कितने प्रतिशत लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं.