बिहार में सरकारी नौकरी की लूट, शिक्षकों के पद पर सबसे ज्यादा बाहरी लोग नियुक्त.

City Post Live

Prashant Kishor

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में सरकारी नौकरियों पर दूसरे राज्यों के लोगों का कब्ज़ा हो रहा है.बिहार सरकार द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति में बिहारियों को बेहद कम दूसरे राज्यों के लोगों को ज्यादा नौकरियां मिली हैं.जन सुराज पार्टी के अनुसार बिहार में 3 लाख नहीं बल्कि 268548 शिक्षकों की नियुक्ति हुई है.सबसे ख़ास बात ये है कि इनमें  1.80 लाख पदों पर  बाहरी लोग नियुक्त हुए हैं.बाहरी शिक्षक की नियुक्ति को लेकर जन-सुराज के इस दावे के बाद डोमिसाइल नीति  लागू करने की मांग जोर पकड़ सकती है.

प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी का दावा है कि बिहार में तीन लाख नहीं, बल्कि 2 लाख 68 हजार 548 शिक्षकों की नियुक्ति हुई है. यह नियुक्ति तीन चरणों में हुई है.और इनमें  1.80 लाख पदों पर  बाहरी लोग नियुक्त हुए हैं. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अमित विक्रम और महेंद्र बैठा ने आरोप लगाया कि डोमिसाइल नीति नहीं होने से बिहार के युवाओं की हकमारी हुई है.उन दोनों से सरकार से मांग की कि श्वेत-पत्र जारी कर यह बताया जाए कि बिहार के कितने युवा-युवती शिक्षक नियुक्त किए गए. बीपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण कर राज्यकर्मी का दर्जा पा चुके पहले से नियोजित शिक्षकों की संख्या लगभग 90 हजार है, जो कि बाहरी हैं. वहीं 90 हजार बाहरी बीपीएससी शिक्षक हैं.

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यानी कि बिहार के मात्र 80 से 90 हजार मात्र युवाओं को नौकरी मिली है.आवासीय और आधार कार्ड में फर्जीवाड़ा कर बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के लोग शिक्षक बने हैं. यह संख्या भी लगभग 10 हजार है. औद्योगीकरण पर भी जन सुराज ने सवाल उठाया है.जन सुराज के अनुसार  बांका में अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट तो लगा नहीं, बिहार में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क की स्थापना भी मात्र वादा रह गया. पूरे देश में सात टेक्सटाइल पार्क बने हैं. केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह बिहार के ही हैं, लेकिन अपने राज्य में एक टेक्सटाइल पार्क नहीं ला सके.

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