सिटी पोस्ट लाइव :: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बड़ा बखेड़ा खड़ा हो चूका है. विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को लाभ पहुंचाने के लिए यह कवायद हो रही है. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है.सुप्रीम कोर्ट ने भी पूछा है कि आयोग नागरिकता जांच जैसे मामलों में क्यों दखल दे रहा है.कोर्ट ने कहा कि ये काम तो गृह मंत्रालय का है. कोर्ट के इस रुख से बीजेपी की टेंशन बढ़ गई है.
पार्टी के आंतरिक चुनाव-पूर्व सर्वेक्षण टीमों को कथित तौर पर जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है. इसके पीछे वजह है कि लोगों को चिंता है कि एसआईआर के तहत उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं. पार्टी की टेलीफोन-आधारित सर्वेक्षण टीम के एक सदस्य के अनुसार SIR ने पार्टी को गलत रास्ते पर धकेलना शुरू कर दिया है. जब भी हम मतदाताओं से फ़ोन पर बात करके यह जानना चाहते हैं कि वे बीजेपी से क्या उम्मीद करते हैं और वे बीजेपी को उनके सपने साकार करने में कैसे मदद कर सकते हैं, तो अधिकतर लोग SIR और बीजेपी के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.
मतदाता सूची में बने रहने के लिए मांगे जा रहे दस्तावेज को लेकर लोगों की नाराजगी बढती जा रही है.लोग सवाल कर रहे हैं कि उनके नाम दो दशकों से भी ज़्यादा समय से मतदाता सूची में हैं, ऐसे में उनसे नागरिकता का प्रमाण क्यों माँगा जा रहा है? एसआईआर प्रक्रिया के कारण बीजेपी नेताओं को विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
निर्वाचन आयोग ने 24 जून को बिहार के आठ करोड़ मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन शुरू करने के लिए एक अधिसूचना जारी की. इस प्रक्रिया के अनुसार, राज्य के सभी मतदाताओं को अपने नाम, पते और फोटो के साथ प्रपत्रों की प्रतियों पर हस्ताक्षर करने होंगे और उन्हें नए फोटोग्राफ और निवास के वैध प्रमाण के साथ वापस भेजना होगा. हालांकि, जिन लोगों के नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे, उन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे.
विशेष गहन पुनरीक्षण पर विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन ने हमला बोला है. आरजेडी नेता तेजस्तवी यादव, कांग्रेस के राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के नेताओं का आरोप है कि सत्तारूढ़ एनडीए को लाभ पहुंचाने के लिए यह कवायद हो रही है. विपक्षी गठबंधन का दावा है कि निर्वाचन आयोग, जिसने महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को कथित तौर पर फर्जी मतदाताओं को जोड़कर मदद की थी, अब बिहार में ऐसे कई लोगों के नाम गलत तरीके से हटाने की कोशिश कर रहा है. इन लोगों के सत्तारूढ़ दल को वोट देने की संभावना नहीं है.